केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक के दौरान 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए। यह कदम कार्यक्रम की आठ वर्षों की लगातार प्रगति को दर्शाता है। इन दिशानिर्देशों के जारी होने के साथ 'एनीमिया मुक्त भारत' का नाम बदलकर 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' कर दिया गया है, जो सिर्फ़ सप्लीमेंट देने के बजाय जांच, इलाज, सही खान-पान और 'जन चेतना' के ज़रिए समुदाय की भागीदारी को शामिल करने वाले व्यापक नज़रिए को दर्शाता है। संशोधित रूपरेखा निवारक देखभाल से इलाज-आधारित देखभाल की ओर बदलाव को दर्शाती है, जिसमें जांच, इलाज, निगरानी और केस-आधारित प्रबंधन पर अधिक बल दिया गया है। दिशानिर्देश मौजूदा 6x6x6 रणनीति को 7x7x7 फ्रेमवर्क में बदलते हैं, जिसमें सातवां लाभार्थी समूह, सातवां हस्तक्षेप और सातवां संस्थागत तंत्र जोड़ा गया है। सातवें लाभार्थी समूह के तौर पर कम वज़न (LBW) वाले 0-6 महीने के बच्चों को शामिल किया गया है। सातवें हस्तक्षेप के रूप में आयरन से भरपूर 'सही खान-पान' को अपनाया गया है, जबकि डिजिटल ट्रैकिंग के लिए मज़बूत निगरानी एवं मूल्यांकन रूपरेखा सातवां संस्थागत तंत्र है। अभियान T3 अप्रोच (टेस्ट, ट्रीट, टॉक) से T4 अप्रोच (टेस्ट, ट्रीट, टॉक, ट्रैक) की ओर बढ़ रहा है। गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में गंभीर एवं सामान्य इलाज से बेअसर एनीमिया के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (एफसीएम और आयरन सुक्रोज) को शामिल किया गया है। सेवाओं की डिजिटल ट्रैकिंग, विश्लेषण एवं नियोजन के लिए एकीकृत 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल' बनाया गया है।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने 16वीं CCHFW बैठक में नामांतरित 'एनीमिया मुक्त भारत अभियान' के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें 6x6x6 रणनीति को 7x7x7 फ्रेमवर्क में विस्तारित किया गया, T4 (टेस्ट, ट्रीट, टॉक, ट्रैक) अप्रोच अपनाई गई और एकीकृत डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक के दौरान एनीमिया मुक्त भारत अभियान के परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।
- एनीमिया मुक्त भारत का नाम बदलकर एनीमिया मुक्त भारत अभियान कर दिया गया है, जो निवारक देखभाल से इलाज-आधारित देखभाल की ओर बदलाव को दर्शाता है।
- मौजूदा 6x6x6 रणनीति को 7x7x7 फ्रेमवर्क में विस्तारित किया गया है, जिसमें सातवां लाभार्थी समूह (कम वज़न वाले 0-6 महीने के बच्चे), सातवां हस्तक्षेप (सही खान-पान) और सातवां संस्थागत तंत्र (डिजिटल ट्रैकिंग हेतु निगरानी एवं मूल्यांकन) शामिल हैं।
- अभियान T3 अप्रोच (टेस्ट, ट्रीट, टॉक) से T4 अप्रोच (टेस्ट, ट्रीट, टॉक, ट्रैक) की ओर बढ़ रहा है।
- गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में गंभीर एवं सामान्य इलाज से बेअसर एनीमिया के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (एफसीएम और आयरन सुक्रोज) को शामिल किया गया है।
- डिजिटल ट्रैकिंग, विश्लेषण एवं नियोजन के लिए एकीकृत एनीमिया मुक्त भारत अभियान पोर्टल बनाया गया है, जिसमें जननी, आरबीएसके और U-WIN पोर्टल का डेटा एकीकृत होगा।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अपनाई गई T4 रणनीति के चार घटकों को निम्नलिखित में से कौन-सा सही रूप से दर्शाता है?
संशोधित एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत अभियान T3 अप्रोच (टेस्ट, ट्रीट, टॉक) से T4 अप्रोच की ओर बढ़ा, जिसमें ट्रैक जोड़ा गया है। इस प्रकार T4 का अर्थ है टेस्ट (जांच), ट्रीट (इलाज), टॉक (बातचीत) और ट्रैक (निगरानी), जो स्क्रीनिंग, फॉलो-अप और देखभाल की निरंतरता को मज़बूत करता है।
स्रोत: PIB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के परिचालन दिशानिर्देश किसने जारी किए?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक के दौरान इन्हें जारी किया।
7x7x7 फ्रेमवर्क क्या है?
यह पिछली 6x6x6 रणनीति का विस्तार है, जिसमें सातवां लाभार्थी समूह (कम वज़न वाले 0-6 महीने के बच्चे), सातवां हस्तक्षेप (सही खान-पान) और सातवां संस्थागत तंत्र (डिजिटल ट्रैकिंग हेतु निगरानी एवं मूल्यांकन) जोड़ा गया है।
T4 रणनीति का क्या अर्थ है?
T4 का अर्थ है टेस्ट (जांच), ट्रीट (इलाज), टॉक (बातचीत) और ट्रैक (निगरानी), जो स्क्रीनिंग, फॉलो-अप और देखभाल की निरंतरता को मज़बूत करने हेतु पिछली T3 अप्रोच से आगे का चरण है।
गंभीर एनीमिया के लिए कौन-सा क्लिनिकल इलाज शामिल किया गया है?
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में गंभीर एवं सामान्य इलाज से बेअसर मामलों के लिए इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (एफसीएम और आयरन सुक्रोज) को शामिल किया गया है।
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