नीति आयोग ने 2 जुलाई 2026 को 'स्ट्रेटेजिक रोडमैप फॉर मेकिंग आयुर्वेद ग्लोबल' शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की वर्तमान स्थिति का व्यापक आकलन प्रस्तुत करते हुए आयुर्वेद को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए चरणबद्ध रोडमैप की रूपरेखा दी गई है। यह रिपोर्ट नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने नीति आयोग के सदस्य प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास तथा आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की उपस्थिति में जारी की। इस अवसर पर नीति आयोग, आयुष मंत्रालय, विदेश मंत्रालय तथा विभिन्न सरकारी, अनुसंधान एवं उद्योग संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. लाहिड़ी ने कहा कि आयुर्वेद का वैश्वीकरण भारत को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे आर्थिक लाभ, रोजगार सृजन, निर्यात में वृद्धि तथा भारत की ज्ञान-आधारित सॉफ्ट पावर को मजबूती मिलेगी; उन्होंने समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। प्रो. श्रीनिवास ने कहा कि वैश्वीकरण केवल बाज़ार या निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करना तथा उपचार का साक्ष्य-आधारित अतिरिक्त विकल्प देना है, जो 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की भावना को साकार करता है। आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने पिछले एक दशक में मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों तथा उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
यह अध्ययन नीति आयोग के स्वास्थ्य प्रभाग द्वारा प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के सहयोग से किया गया। इसमें आयुर्वेद के वैश्वीकरण के लिए तीन-स्तंभीय रूपरेखा - उपलब्धता, स्वीकार्यता और प्रसार - तथा विकसित भारत @2047 की कल्पना के अनुरूप वर्ष 2047 तक की चरणबद्ध रणनीति प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट भारत की 'एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य' प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करती है।
