रेल मंत्रालय ने 2 मई 2026 को बताया कि मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली ने अपना पहला 16 डिब्बों वाला वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट तैयार कर परीक्षण और क्षेत्रीय ट्रायल के लिए भेज दिया है। मंत्रालय की विज्ञप्ति में इसे महत्वपूर्ण अवसर बताया गया, क्योंकि मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली अब वंदे भारत ट्रेनसेट बनाने वाले निर्माताओं के समूह में शामिल हो गई है। इसमें यह भी कहा गया कि वंदे भारत यात्रा 2018 में दो ट्रेनसेट से शुरू हुई थी और अब अपने 100वें ट्रेनसेट के पड़ाव के करीब है, इसलिए यह ट्रेनसेट भारत के रेल रोलिंग स्टॉक आधुनिकीकरण का हिस्सा है। ट्रेनसेट सीमेंस प्रणोदन प्रणाली से सुसज्जित है और यात्री सेवा में शामिल होने से पहले दोलन परीक्षणों से गुजरेगा। ये परीक्षण यात्रा गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और गतिशील प्रदर्शन की पुष्टि करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि ट्रेन गति, दक्षता और यात्री आराम से जुड़े वंदे भारत मानकों को बनाए रखती है, साथ ही विश्वसनीयता और सुरक्षा के लिए इंजीनियरिंग तथा प्रदर्शन सुधार भी जोड़े गए हैं। यात्री सुविधाओं में आरामदायक सीटें, झटका रहित यात्रा, पूरी तरह सीलबंद गैंगवे और शोर घटाने वाले स्वचालित प्लग दरवाजे शामिल हैं। सुरक्षा और मजबूती से जुड़ी सुविधाओं में स्वदेशी कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, एयरोसोल आधारित नियंत्रण वाली उन्नत आग पहचान प्रणाली और निचले उपकरणों के लिए बाढ़ सुरक्षा शामिल है। विज्ञप्ति में उच्च गुणवत्ता वाली आंतरिक सज्जा के लिए वैक्यूम इन्फ्यूजन तकनीक का भी उल्लेख किया गया। ट्रेनसेट को दिव्यांगजन अनुकूल बताया गया है, जिसमें समर्पित रैंप, निर्धारित स्थान और सुगम्यता के लिए विशेष सुविधाएं हैं। यह सार्वजनिक प्रशासन के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें विनिर्माण क्षमता, स्वदेशी सुरक्षा तकनीक और समावेशी यात्री डिजाइन को एक रेल आधुनिकीकरण परियोजना में जोड़ा गया है। यह नवाचार, समावेशन और विश्वस्तरीय विनिर्माण मानकों के प्रति भारतीय रेल की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।
रेल मंत्रालय ने कहा कि मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली ने 2 मई 2026 को सीमेंस प्रणोदन, कवच और सुगम्यता सुविधाओं से लैस अपना पहला 16 डिब्बों वाला वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट तैयार किया
मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली ने 2 मई 2026 को 16 डिब्बों वाला अपना पहला वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट तैयार कर परीक्षण और क्षेत्रीय ट्रायल के लिए भेजा। ट्रेन में सीमेंस प्रणोदन, कवच, आग का पता लगाने वाली प्रणाली, बाढ़ सुरक्षा, सीलबंद गैंगवे, स्वचालित प्लग दरवाजे और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं हैं। मंत्रालय ने इसे वंदे भारत कार्यक्रम के 100वें ट्रेनसेट की दिशा में प्रगति और भारत के रोलिंग स्टॉक आधुनिकीकरण से जोड़ा।
मुख्य तथ्य
- मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली ने 2 मई 2026 को अपना पहला 16 डिब्बों वाला वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट निकाला।
- ट्रेनसेट को नियमित यात्री सेवा से पहले परीक्षण और क्षेत्रीय ट्रायल के लिए भेजा गया।
- इसमें सीमेंस प्रणोदन प्रणाली लगी है और यात्रा गुणवत्ता, सुरक्षा तथा गतिशील प्रदर्शन के लिए दोलन परीक्षण होंगे।
- यात्री सुविधाओं में आरामदायक सीटें, झटका रहित यात्रा, सीलबंद गैंगवे और कम शोर के लिए स्वचालित प्लग दरवाजे हैं।
- सुरक्षा सुविधाओं में कवच, एयरोसोल आधारित दमन वाली उन्नत आग पहचान और निचले उपकरणों की बाढ़ सुरक्षा शामिल है।
- ट्रेन दिव्यांगजन अनुकूल है, जिसमें रैंप, निर्धारित स्थान और विशेष सुगम्यता सुविधाएं हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली के वंदे भारत ट्रेनसेट में कौन सी स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लगी है?
विज्ञप्ति बताती है कि ट्रेनसेट स्वदेशी कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित है। गगन, सागर वाणी और भुवन पंचायत अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े हैं और इस रोलआउट की ट्रेन सुरक्षा प्रणाली नहीं हैं।
स्रोत: Ministry of Railways
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली ने क्या तैयार किया?
फैक्ट्री ने अपना पहला 16 डिब्बों वाला वंदे भारत चेयर कार ट्रेनसेट तैयार किया और उसे परीक्षण तथा क्षेत्रीय ट्रायल के लिए भेजा।
यात्री सेवा से पहले ट्रेन किन परीक्षणों से गुजरेगी?
यात्रा की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और चलते समय प्रदर्शन की पुष्टि के लिए वह दोलन परीक्षणों से गुजरेगी।
विज्ञप्ति में कौन सी सुरक्षा तकनीकें बताई गई हैं?
विज्ञप्ति में कवच, एयरोसोल आधारित दमन व्यवस्था के साथ आग का पता लगाने की उन्नत प्रणाली और नीचे लगे उपकरणों के लिए बाढ़ सुरक्षा का उल्लेख है।
ट्रेन में सुगम्यता का ध्यान कैसे रखा गया है?
इसे दिव्यांगजन के अनुकूल बताया गया है; इसमें अलग रैंप, निर्धारित स्थान और विशेष सुविधाएं हैं।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें