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मौर्य, गुप्त और गुप्तोत्तर साम्राज्य MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए मौर्य, गुप्त और गुप्तोत्तर साम्राज्य के 9 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1कथन 1: 1837 में जेम्स प्रिंसेप द्वारा ब्राह्मी लिपि पढ़े जाने से अशोक के कई अभिलेख पढ़े जा सके। कथन 2: अशोक के अभिलेखों को उत्तर मौर्य चरण का सबसे प्रत्यक्ष स्रोत माना गया है। निम्न में से कौन-सा सही है?

A कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है
B दोनों कथन सही हैं
C कथन 1 गलत है, लेकिन कथन 2 सही है
D दोनों कथन गलत हैं
व्याख्या

अशोक के कई अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में थे, जबकि कुछ क्षेत्रों में दूसरी लिपियां और भाषाएं भी दिखती हैं। 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी को पढ़ा, इसलिए यह अभिलेखीय सामग्री समझ में आई। इसी हिस्से में अशोक के अभिलेखों को उत्तर मौर्य चरण का सबसे प्रत्यक्ष स्रोत माना गया है, क्योंकि वे राजकीय संदेश हैं, न कि केवल ग्रंथ या विदेशी विवरण। इसलिए दोनों कथन साथ-साथ सही हैं।

प्र.2अभिकथन (A): गुप्त काल को शास्त्रीय उत्कर्ष का युग बताया गया है, लेकिन पूरे भारत में समान समृद्धि और प्रत्यक्ष शासन का युग नहीं माना गया है। कारण (R): संस्कृत साहित्य, कला, विज्ञान, धर्म और मुद्राओं की उपलब्धियों का उल्लेख किया जाता है, साथ ही स्वर्ण युग की धारणा को बहुत शाब्दिक रूप में पढ़ने से सावधान भी करते हैं। सही उत्तर चुनिए।

A A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं करता।
B A सही है, लेकिन R गलत है।
C A और R दोनों सही हैं, और R, A की सही व्याख्या करता है।
D A गलत है, लेकिन R सही है।
व्याख्या

अभिकथन वही संतुलित समझ रखता है जो अपेक्षित है। गुप्त युग को साहित्य, कला, विज्ञान, धर्म और मुद्राओं की उपलब्धियों के कारण शास्त्रीय उत्कर्ष का युग कहा गया है। कालिदास, गुप्त मुद्रा-प्रकार, मंदिर स्थापत्य, 499 ईस्वी की आर्यभटीय और वराहमिहिर जैसे विद्वान इसी व्यापक सांस्कृतिक वातावरण में आते हैं। साथ ही स्वर्ण युग को पूरे भारत में समान समृद्धि, शांति और प्रत्यक्ष शासन के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। इसलिए कारण अभिकथन की व्याख्या करता है।

प्र.3सूची 1 को सूची 2 से मिलाइए। सूची 1: 1. चंद्रगुप्त प्रथम 2. समुद्रगुप्त 3. आर्यभट 4. फा-हियान सूची 2: क. 499 ईस्वी में आर्यभटीय की रचना ख. 320 ईस्वी से शुरू गुप्त संवत से संबंध ग. चंद्रगुप्त द्वितीय के समय भारत यात्रा घ. प्रयाग प्रशस्ति में वर्णित अभियान

A 1-क, 2-ख, 3-ग, 4-घ
B 1-ख, 2-ग, 3-घ, 4-क
C 1-ख, 2-घ, 3-क, 4-ग
D 1-घ, 2-क, 3-ख, 4-ग
व्याख्या

चंद्रगुप्त प्रथम को गुप्त साम्राज्य की उन्नति, महाराजाधिराज उपाधि और 320 ईस्वी से शुरू गुप्त संवत से जोड़ा गया है। समुद्रगुप्त के अभियानों का प्रमुख स्रोत हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति है। आर्यभट ने 499 ईस्वी में आर्यभटीय लिखी, जिससे गुप्तकालीन विज्ञान की पहचान बनती है। फा-हियान चंद्रगुप्त द्वितीय के समय भारत आया और बौद्ध संस्थाओं, शहरी व्यवस्था तथा समाज पर विवरण देता है। इसलिए सही मिलान 1-ख, 2-घ, 3-क, 4-ग है।

प्र.4अशोक की सार्वजनिक धम्म नीति के पीछे निर्णायक मोड़ कौन-सी घटना थी?

A चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा सेल्यूकस निकेटर की पराजय
B 261 ईसा पूर्व का अशोक का कलिंग युद्ध
C जेम्स प्रिंसेप द्वारा ब्राह्मी लिपि का वाचन
D प्रयाग प्रशस्ति में वर्णित समुद्रगुप्त के अभियान
व्याख्या

261 ईसा पूर्व के कलिंग युद्ध को अशोक के शासन का निर्णायक मोड़ बताया जाता है। तेरहवें प्रमुख शिलालेख में विजय से हुई पीड़ा पर अशोक के पश्चाताप का संकेत मिलता है। इसके बाद धम्म उसकी सार्वजनिक राजभाषा का केंद्र बना। धम्म कोई संकीर्ण बौद्ध कानून नहीं था; उसमें बड़ों का सम्मान, संयम, दया, सहिष्णुता और कल्याण जैसे सूत्र थे। सेल्यूकस पर चंद्रगुप्त की विजय, ब्राह्मी का वाचन और समुद्रगुप्त के अभियान अलग प्रसंग हैं।

प्र.5सूची I को सूची II से मिलाइए: सूची I: 1. चंद्रगुप्त प्रथम 2. समुद्रगुप्त 3. चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य 4. आर्यभट सूची II: क. 499 ईस्वी में आर्यभटीय की रचना ख. पश्चिमी शक क्षत्रपों की पराजय और पश्चिमी व्यापार मार्गों तक पहुंच ग. गुप्त संवत और महाराजाधिराज उपाधि घ. हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति सही कूट चुनिए।

A 1-क, 2-ख, 3-ग, 4-घ
B 1-ख, 2-ग, 3-घ, 4-क
C 1-घ, 2-क, 3-ख, 4-ग
D 1-ग, 2-घ, 3-ख, 4-क
व्याख्या

चंद्रगुप्त प्रथम को गुप्त साम्राज्यात्मक चरण, 320 ईस्वी से जुड़े गुप्त संवत, लिच्छवि संबंध और महाराजाधिराज उपाधि से जोड़ा जाता है। समुद्रगुप्त के अभियानों का मुख्य स्रोत हरिषेण रचित प्रयाग प्रशस्ति है। चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य ने पश्चिमी शक क्षत्रपों को हराकर पश्चिमी व्यापार मार्गों और रजत मुद्रा परंपरा तक पहुंच बढ़ाई। आर्यभट ने 499 ईस्वी में आर्यभटीय की रचना की, इसलिए गुप्तकालीन विज्ञान भारतीय शास्त्रीय बौद्धिक इतिहास का महत्वपूर्ण भाग बनता है।

आपने 9 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6गुप्तोत्तर उत्तर भारत के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन गलत है?

Aहर्षवर्धन ने 606 से 647 ईस्वी तक शासन किया और कन्नौज को प्रमुख केंद्र बनाया।
Bपुलकेशिन द्वितीय बंगाल का पाल शासक था, जिसने नर्मदा के पास हर्ष को रोका।
C634 ईस्वी का रविकीर्ति रचित ऐहोल अभिलेख पुलकेशिन द्वितीय की उपलब्धियों का प्रमुख स्रोत है।
Dकन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष में गुर्जर-प्रतिहार, पाल और राष्ट्रकूट शामिल थे।

7मौर्य स्रोतों के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: कथन 1: अशोक के अभिलेखों को उत्तर-मौर्य चरण का सबसे प्रत्यक्ष स्रोत बताया गया है। कथन 2: अर्थशास्त्र परंपरा को मौर्य शासन के हर काम की दैनिक डायरी माना जाना चाहिए। कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Aकेवल कथन 1
Bकेवल कथन 2
Cकथन 1 और कथन 2 दोनों
Dन तो कथन 1, न कथन 2

8अशोक की सार्वजनिक धम्म नीति के पीछे तत्काल मोड़ कौन-सी घटना थी?

A261 ईसा पूर्व का कलिंग युद्ध
Bसेल्यूकस निकेटर की हार
Cगुप्त संवत की शुरुआत
Dकन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष

9अभिकथन: गुप्त साम्राज्य की शक्ति को मौर्य केंद्रीकरण की सीधी पुनरावृत्ति नहीं मानना चाहिए। कारण: गुप्त शक्ति हर जगह समान प्रत्यक्ष प्रशासन के बजाय विजय, गठबंधन, कर, भूमि-अनुदान और साम्राज्यिक प्रतिष्ठा के मेल पर आधारित थी। सही उत्तर चुनिए।

Aअभिकथन सही है, लेकिन कारण गलत है
Bअभिकथन गलत है, लेकिन कारण सही है
Cअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण अभिकथन की व्याख्या नहीं करता
Dअभिकथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण अभिकथन की व्याख्या करता है

भारतीय इतिहास (प्राचीन एवं मध्यकालीन) में और विषय

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