MCQ
भक्ति एवं सूफी आंदोलन; बौद्ध और जैन धर्म MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए भक्ति एवं सूफी आंदोलन; बौद्ध और जैन धर्म के 10 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1भक्ति परंपराओं के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए: कथन 1: आलवार विष्णु-भक्त वैष्णव तमिल कवि-संत थे। कथन 2: नयनार शिव-भक्त शैव तमिल कवि-संत थे, और उनके भजन तेवरम् से जुड़े हैं। कथन 3: निर्गुण भक्ति का अर्थ नास्तिकता और भक्ति का अस्वीकार है। कौन-से कथन सही हैं?
दक्षिण भारतीय भक्ति परंपराओं को अलग-अलग रखा जाता है। आलवार विष्णु-भक्त वैष्णव तमिल कवि-संत थे और उनका काव्य नालायिर दिव्य प्रबंधम् से जुड़ता है। नयनार शिव-भक्त शैव तमिल कवि-संत थे और उनके भजन तेवरम् से जुड़े हैं। लेकिन निर्गुण भक्ति का अर्थ नास्तिकता या भक्ति का अस्वीकार नहीं है। इसमें मूर्ति, जाति-कर्मकांड और संकीर्ण धार्मिक पहचान से परे निराकार ईश्वर पर बल है; कबीर इसका प्रमुख परीक्षा-योग्य उदाहरण हैं।
प्र.2अभिकथन (A): सूफी इतिहास में खानकाह और दरगाह को एक ही संस्था नहीं मानना चाहिए। कारण (R): खानकाह जीवित गुरु और शिष्यों का शिक्षण-सेवा केंद्र थी, जबकि दरगाह दिवंगत संत की मजार-स्मृति का स्थल थी। सही उत्तर चुनिए।
सूफी संस्थाओं के बीच साफ अंतर रखा जाता है। खानकाह वह जीवित केंद्र थी जहाँ पीर या शैख मुरिदों को मार्गदर्शन देता था और शिक्षण, मेहमाननवाजी तथा सेवा होती थी। दरगाह दिवंगत संत की मजार-स्मृति का स्थल थी, जो याद और तीर्थ का केंद्र बनती थी। कारण यही अंतर बताता है, इसलिए वह खानकाह और दरगाह को अलग रखने की बात समझाता है। अजमेर की चिश्ती दरगाह को खानकाह का दूसरा नाम मानना ठीक नहीं है।
प्र.3परंपराओं का उनके जुड़े हुए संकेतों से मिलान कीजिए। सूची 1: 1. आलवार 2. नयनार 3. चिश्ती परंपरा 4. जैन धर्म सूची 2: क. शैव तमिल कवि-संत ख. वैष्णव तमिल कवि-संत ग. पाँच महाव्रत घ. खानकाह की सेवा और समा सही कूट चुनिए।
इन परंपराओं को साफ अलग रखा जाता है। आलवार विष्णु-भक्त वैष्णव तमिल कवि-संत थे, जबकि नयनार शिव-भक्त शैव तमिल कवि-संत थे। चिश्ती धारा खानकाह की सेवा, विनम्रता, भोजन, समा और दरबारी सत्ता से दूरी की आदर्श छवि से जोड़ी जाती है। जैन धर्म के स्थिर संकेतों में पाँच महाव्रत आते हैं। इसलिए सही मिलान आलवार-वैष्णव तमिल भक्ति, नयनार-शैव तमिल भक्ति, चिश्ती-खानकाह और समा, तथा जैन धर्म-पाँच महाव्रत है।
प्र.4सूफी संस्थाओं के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
प्रश्न गलत कथन पूछता है, इसलिए मुख्य बात संस्था-भेद है। खानकाह जीवित गुरु और शिष्यों का शिक्षण-सेवा केंद्र होती है, जबकि दरगाह किसी दिवंगत संत की मजार-स्मृति का स्थल होती है। दोनों सूफी सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हैं, पर एक ही संस्था नहीं हैं। बाकी कथन सही हैं: सिलसिला आध्यात्मिक श्रृंखला है, पीर या शेख मुरिदों का मार्गदर्शन करते हैं और जिक्र ईश्वर-स्मरण है।
प्र.56वीं शताब्दी ईसा पूर्व में बौद्ध और जैन धर्म के उभार को कौन-सी पृष्ठभूमि सबसे ठीक समझाती है?
बौद्ध और जैन धर्म को महाजनपद-युग की 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व वाली श्रमण पृष्ठभूमि में रखा जाता है। नगर, व्यापार, सिक्के, नए शासक और व्यापारी दानदाता ऐसे माहौल बना रहे थे जहाँ महंगे यज्ञ और जन्म-आधारित प्रतिष्ठा पर प्रश्न उठे। इसका अर्थ वैदिक परंपरा का अचानक अंत नहीं है, और न ही ये केवल जंगल की तपस्या थे। इनके उभार में धार्मिक आलोचना, नगरीय जीवन, गृहस्थ समर्थन और नैतिकता, कर्म, पुनर्जन्म तथा मुक्ति के नए विचार साथ आए।
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और प्रश्न
6दी गई बौद्ध जीवन-स्थल श्रृंखला के अनुसार बुद्ध के प्रथम उपदेश से कौन-सा स्थल जुड़ा है?
7जैन धर्म के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन गलत है?
8बौद्ध जीवन-स्थल को संबंध से मिलाइए: सूची I: 1. लुम्बिनी 2. बोधगया 3. सारनाथ 4. कुशीनगर सूची II: क. प्रथम उपदेश ख. महापरिनिब्बान ग. जन्म घ. ज्ञान-प्राप्ति सही मिलान कौन-सा है?
9अभिकथन: सभी भक्ति परंपराओं ने मंदिरों और मूर्ति-आधारित भक्ति को अस्वीकार किया। कारण: सगुण भक्ति में ईश्वर को गुण और रूप के साथ, विशेषकर राम या कृष्ण के रूप में, पूजा जाता है। सही उत्तर चुनिए।
10निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। कथन 1: बौद्ध धर्म अनात्म का सिद्धांत बताता है, यानी स्थायी आत्मा का अभाव। कथन 2: जैन धर्म में जीव को बन्धन और मोक्ष के केंद्र में रखा जाता है। कथन 3: आजीवक नियति और बौद्ध कर्म एक ही बात हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
