मई 2026 के मध्य में पर्यावरण से जुड़े कई आदेशों में, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण प्रशासन से संबंधित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। एनजीटी ने निर्देश दिया कि दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड (डीआरएमबी) का गठन किया जाए और वह सौंपे गए कार्य को यथासंभव शीघ्र आगे बढ़ाए। दिल्ली रिज अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है। इसे राष्ट्रीय राजधानी का हरित फेफड़ा माना जाता है और यह शहर की जलवायु को नियंत्रित करने, भूजल का पुनर्भरण करने और जैव विविधता को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिज प्रबंधन बोर्ड रिज क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन के लिए नामित निकाय है। एक अन्य आदेश में, एनजीटी ने भारत के केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को दिल्ली के शाहदरा इलाके में एक कथित अवैध जल बॉटलिंग संयंत्र के संचालन के संबंध में जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिससे भूजल के अनियंत्रित दोहन की ओर ध्यान गया। अधिकरण ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और एक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जवाब दाखिल करने का भी निर्देश दिया कि क्या नदियों में दूध और अन्य पदार्थ डालने की प्रथा पर्यावरण संबंधी किसी दिशानिर्देश के तहत विनियमित है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एक विशेष न्यायिक निकाय है। यह पर्यावरण संरक्षण तथा वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटान के लिए बनाया गया है। ये आदेश पर्यावरणीय जवाबदेही सुनिश्चित करने और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करने में अधिकरण की निरंतर भूमिका को रेखांकित करते हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के गठन का निर्देश दिया और राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरणीय उल्लंघनों पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से जवाब माँगा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के गठन का निर्देश दिया और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरणीय उल्लंघनों पर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब माँगा।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने निर्देश दिया कि दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाए और वह अपना कार्य शीघ्रता से आगे बढ़ाए।
- दिल्ली रिज अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है और इसे राष्ट्रीय राजधानी का हरित फेफड़ा माना जाता है।
- रिज प्रबंधन बोर्ड रिज क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
- एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को दिल्ली के शाहदरा में एक कथित अवैध जल बॉटलिंग संयंत्र पर जवाब देने का निर्देश दिया।
- एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नदियों में दूध डालने को विनियमित करने के मुद्दे पर जवाब देने का निर्देश दिया।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरणीय मामलों के शीघ्र निपटान के लिए हुई थी।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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दिल्ली रिज के संबंध में निम्नलिखित दो कथनों पर विचार करें:\n1. दिल्ली रिज अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है।\n2. दिल्ली रिज को राष्ट्रीय राजधानी का हरित फेफड़ा माना जाता है।\nऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
कथन 1 सही है, क्योंकि दिल्ली रिज अरावली पर्वत-श्रृंखला का विस्तार है। अरावली को भारत की सबसे पुरानी वलित पर्वत-श्रृंखला माना जाता है। कथन 2 भी सही है। रिज राष्ट्रीय राजधानी का हरित फेफड़ा कहलाता है, क्योंकि यह शहर की जलवायु नियंत्रित करने, भूजल पुनर्भरण और जैव-विविधता के संरक्षण में मदद करता है। इसलिए दोनों कथन सही हैं।
स्रोत: Down To Earth
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय हरित अधिकरण क्या है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत स्थापित एक विशेष न्यायिक निकाय है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण तथा वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों का प्रभावी और शीघ्र निपटारा करना है।
दिल्ली रिज क्या है?
दिल्ली रिज अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी का हरित फेफड़ा माना जाता है। यह शहर की जलवायु को नियंत्रित करने, भूजल पुनर्भरण और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एनजीटी ने दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के संबंध में क्या निर्देश दिया?
एनजीटी ने निर्देश दिया कि दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाए और वह रिज की सुरक्षा व प्रबंधन का सौंपा गया काम यथासंभव शीघ्र आगे बढ़ाए।
एनजीटी ने किन निकायों से जवाब दाखिल करने को कहा?
एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को शाहदरा में एक कथित अवैध पानी बोतलबंद करने वाले संयंत्र पर जवाब देने का निर्देश दिया। साथ ही, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नदियों में दूध डालने के विनियमन पर जवाब देने का निर्देश दिया।
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