12 मई 2026 को डाउन टू अर्थ ने अपना दैनिक कोर्ट डाइजेस्ट प्रकाशित किया, जिसमें तीन प्रमुख पर्यावरणीय आदेशों का सार दिया गया है। ये आदेश भारत के जैव विविधता हॉटस्पॉट, खनन क्षेत्र और भूजल व्यवस्था से जुड़े हैं। पहला, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के पारिस्थितिक संवेदी क्षेत्र के भीतर ऑयल इंडिया लिमिटेड की विस्तारित पहुँच ड्रिलिंग (ईआरडी) परियोजना पर कंपनी का पक्ष सुना; कंपनी ने तर्क दिया कि परियोजना को सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की निगरानी में केवल अनुसंधान उद्देश्यों के लिए पर्यावरण मंजूरी दी गई है और इसमें कोई वाणिज्यिक निष्कर्षण नहीं है। दूसरा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी के समक्ष रखी अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में पाया कि ओडिशा की सुकिंदा घाटी में जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड की कलियापानी क्रोमाइट खानों के शोधित अपशिष्ट में हेक्सावैलेंट क्रोमियम (क्रोमियम छह) की सांद्रता 0.16 मिलीग्राम प्रति लीटर थी, जो निर्धारित मानक 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से तीन गुना से अधिक है, तथा यह अपशिष्ट धरमशाला नाला में छोड़ा जा रहा है, जो ब्राह्मणी नदी से मिलता है। तीसरा, एनजीटी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट की बिछपुरी कोयला खान को निर्देश दिया कि वह आसपास के गाँवों में भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाए तथा सेंदुरी-बैगाटोला, कल्याणपुर और बिछरपुर गाँवों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करे, जहाँ जल सेवा बाधित हुई है। हेक्सावैलेंट क्रोमियम कैंसर पैदा करने वाला ज्ञात पदार्थ है तथा डिब्रू-सैखोवा को रामसर स्थल नहीं बताया जाना चाहिए; PIB की सूची में असम का रामसर स्थल दीपोर बील है। सुकिंदा घाटी में ऐतिहासिक रूप से भारत के लगभग 95 प्रतिशत क्रोमाइट भंडार रहे हैं तथा यह लंबे समय से विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में सूचीबद्ध है।
12 मई 2026 के दैनिक पर्यावरण न्यायालय डाइजेस्ट में डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में ऑयल इंडिया की ईआरडी ड्रिलिंग पर एनजीटी सुनवाई, सुकिंदा घाटी की खानों में निर्धारित सीमा से अधिक हेक्सावैलेंट क्रोमियम पर सीपीसीबी की रिपोर्ट तथा अल्ट्राटेक सीमेंट की बिछपुरी कोयला खान को भूजल पुनर्भरण के निर्देश शामिल हैं
डाउन टू अर्थ के 12 मई 2026 के न्यायालय डाइजेस्ट में डिब्रू-सैखोवा में ऑयल इंडिया की ERD ड्रिलिंग पर NGT सुनवाई, सुकिंदा घाटी की खानों में 0.16 मिलीग्राम प्रति लीटर (सीमा 0.05) हेक्सावैलेंट क्रोमियम पर CPCB के निष्कर्ष तथा अल्ट्राटेक बिछपुरी कोयला खान को भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने के निर्देश शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के पारिस्थितिक संवेदी क्षेत्र में ऑयल इंडिया की ईआरडी ड्रिलिंग पर एनजीटी में सुनवाई
- सीपीसीबी ने कलियापानी क्रोमाइट खानों के अपशिष्ट में 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर सीमा के मुकाबले 0.16 मिलीग्राम प्रति लीटर हेक्सावैलेंट क्रोमियम पाया
- अपशिष्ट ओडिशा में धरमशाला नाले में छोड़ा जा रहा है, जो ब्राह्मणी नदी से मिलता है
- एनजीटी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में अल्ट्राटेक सीमेंट की बिछपुरी कोयला खान को भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाने का निर्देश दिया
- डिब्रू-सैखोवा असम के तिनसुकिया-डिब्रूगढ़ जिलों में स्थित रामसर स्थल और महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र है
- सुकिंदा घाटी में भारत के लगभग 95 प्रतिशत क्रोमाइट भंडार हैं तथा यह विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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निम्नलिखित दो कथनों पर विचार कीजिए: 1. डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान असम के तिनसुकिया-डिब्रूगढ़ जिलों में स्थित है और एक रामसर स्थल है। 2. ओडिशा की सुकिंदा घाटी में भारत के लगभग 95 प्रतिशत क्रोमाइट भंडार हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा या कौन-से सही हैं?
केवल कथन 2 सही है। डिब्रू-सैखोवा असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में स्थित है। असम पर्यावरण एवं वन विभाग इसे जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध करता है, पर असम का रामसर स्थल डीपर बील है, डिब्रू-सैखोवा नहीं। ओडिशा के जाजपुर जिले का सुकिंदा अल्ट्रामैफिक परिसर भारत के कुल क्रोमाइट भंडार में लगभग 95 प्रतिशत योगदान देता है।
स्रोत: Down To Earth
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुकिंदा घाटी कहाँ स्थित है और यह पर्यावरण की दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
सुकिंदा घाटी ओडिशा के जाजपुर जिले में स्थित है। भारत के लगभग 95 प्रतिशत क्रोमाइट भंडार यहीं हैं और हेक्सावैलेंट क्रोमियम के रिसाव के कारण यह लंबे समय से विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में सूचीबद्ध रही है।
12 मई 2026 के डाइजेस्ट में सीपीसीबी का क्या निष्कर्ष था?
सीपीसीबी ने बताया कि जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड की कलियापानी क्रोमाइट खानों से निकलने वाले शोधित अपशिष्ट में हेक्सावैलेंट क्रोमियम की सांद्रता 0.16 मिलीग्राम प्रति लीटर थी, जो निर्धारित सीमा 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से तीन गुना से अधिक है। यह अपशिष्ट धरमशाला नाला में छोड़ा जा रहा है, जो ब्राह्मणी नदी से मिलता है।
डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान कहाँ स्थित है?
डिब्रू-सैखोवा असम के तिनसुकिया तथा डिब्रूगढ़ जिलों में है; यह रामसर स्थल और महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र है, तथा एनजीटी ने इस पारिस्थितिक संवेदी क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर ऑयल इंडिया की ईआरडी ड्रिलिंग परियोजना की सुनवाई की है।
एनजीटी ने बिछपुरी कोयला खान के लिए क्या निर्देश दिया?
एनजीटी ने मध्य प्रदेश के शहडोल में अल्ट्राटेक सीमेंट की बिछपुरी कोयला खान को निर्देश दिया कि वह आसपास के गाँवों में भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण करे तथा सेंदुरी-बैगाटोला, कल्याणपुर और बिछरपुर गाँवों को नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करे।
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