22 मई 2026 को भारत ने जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय के वैश्विक विषय 'वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय कार्रवाई' के तहत अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने इस अवसर पर वैश्विक पर्यावरण सुविधा लघु अनुदान कार्यक्रम भारत परिचालन चरण-7 (GEF-SGP India OP7) के ज़रिए 'तटीय भारत में समुदाय-नेतृत्व वाली जैव विविधता बहाली: स्थानीय कार्रवाई, वैश्विक प्रभाव' शीर्षक से नया प्रकाशन जारी किया। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा क्रियान्वित किया गया है तथा द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) और सामाजिक विकास परिषद ने तकनीकी रूप से तैयार किया है। इस प्रकाशन में तटीय तमिलनाडु और महाराष्ट्र में फैली आठ समुदाय-नेतृत्व वाली बहाली पहलों का विवरण है। इनमें पिचावरम और सुंदरबन-शैली के मुहानों में मैंग्रोव पुनर्जनन, मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमंडल अभयारण्य में समुद्री घास पुनरुद्धार, स्थानीय धान और मोटे अनाज की किस्मों का संरक्षण करने वाले मछुआरा महिला स्वयं सहायता समूह तथा पारंपरिक ओलिव रिडले कछुआ घोंसलों की सुरक्षा शामिल हैं। प्रकाशन में बताया गया है कि ज़मीनी स्तर पर महिला-नेतृत्व वाली कार्रवाई कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे के लक्ष्य 3 — 2030 तक भू-क्षेत्र और महासागरों के 30 प्रतिशत संरक्षण — की पूरक बनती है। इसके साथ ही भारत अपनी नवीनतम राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना तथा मई के पूर्वार्द्ध में CBD को सौंपी गई सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट का क्रियान्वयन जारी रखे हुए है। इस दिवस पर भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थानों तथा चेन्नई स्थित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण मुख्यालय में जैव विविधता जागरूकता कार्यक्रम भी हुए। इनमें स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों, अभिगम और लाभ साझाकरण नियमों तथा 2.96 लाख ग्राम स्तरीय रजिस्टरों से आगे निकल चुके जन जैव विविधता रजिस्टर डेटाबेस पर ध्यान केंद्रित किया गया।