प्रोजेक्ट चीता की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, कुनो राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव प्रभाग के परिदृश्य में 19 स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले चीतों द्वारा किए गए दर्ज शिकारों में बकरी और मवेशी मिलकर 50% रहे, जबकि अकेले चीतल (चित्तीदार हिरण) 42% रहा। सितंबर 2024 से दिसंबर 2025 तक की यह रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी की गई। स्वतंत्र विचरण करने वाले चीतों में चीतल दर्ज शिकारों का 42%, उसके बाद बकरी (30%), मवेशी (20%), नीलगाय (2%) तथा खरगोश, सांबर, चिंकारा, भेड़ और जंगली सूअर (प्रत्येक 1%) रहे। रिपोर्ट में पारिस्थितिक समायोजन और आहार विविधता का उल्लेख किया गया, जिसमें छोटे भारतीय गंधबिलाव के शिकार तथा पक्षियों और छोटे स्तनधारियों का अवसरवादी शिकार शामिल है। ज्वाला और गामिनी जैसी शावकों वाली माताओं ने अधिक बार शिकार किया, जो बढ़ी हुई ऊर्जा माँग को दर्शाता है; ज्वाला के समूह ने मुख्यतः घरेलू बकरियों (40%) पर निर्भरता दिखाई। रिपोर्ट ने पशुधन पर शिकार को रेखांकित करते हुए नकारात्मक अंतःक्रिया को कम करने तथा समुदाय की भागीदारी की आवश्यकता बताई। प्रोजेक्ट चीता निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि उद्यान के मुख्य क्षेत्रों में शिकार घनत्व लगभग 23 चीतल प्रति वर्ग किमी के साथ स्वस्थ है, परंतु वन्यजीव प्रभाग के प्रादेशिक वन में कम है, जहाँ चीते बकरी और मवेशियों का शिकार करते हैं। चीते 12 जिलों में विचरण कर चुके हैं, मध्य प्रदेश और राजस्थान में छह-छह। 2022 में आरंभ इस परियोजना में 20 चीतों (8 नामीबिया, 12 दक्षिण अफ्रीका से) की संस्थापक आबादी लाई गई थी, जो अब बढ़कर 53 हो गई है।