भारत ने जैव विविधता पर अभिसमय (CBD) को अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें कुनमिंग-मॉंट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे (KMGBF) के अनुरूप 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBT) और 142 सूचकांकों की दिशा में देश की प्रगति का व्यापक आकलन दिया गया है। 2022 में देशों द्वारा KMGBF अपनाए जाने के बाद यह भारत का पहला पूर्ण प्रगति आकलन है। रिपोर्ट में पाया गया कि 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों में से केवल दो सही दिशा में हैं, यानी जैव विविधता-समावेशी भूमि एवं समुद्र उपयोग योजना पर NBT1 और पारिस्थितिकी तंत्र बहाली पर NBT2। एक प्रमुख चिंता भू-क्षरण है। भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 29.77 प्रतिशत, यानी लगभग 9.7 करोड़ हेक्टेयर, क्षरणग्रस्त है, जिससे संकेत मिलता है कि नया क्षरण बहाली प्रयासों से आगे निकल रहा हो सकता है। संरक्षण के दायरे की बात करें तो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का केवल पांच प्रतिशत से कुछ अधिक हिस्सा औपचारिक संरक्षित क्षेत्र के रूप में नामित है। यह ढांचे के अंतर्गत वैश्विक 30 प्रतिशत संरक्षण लक्ष्य से बहुत कम है, और रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि भारत 2030 तक इस लक्ष्य को पूरा करेगा या नहीं। फिर भी रिपोर्ट प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण में उल्लेखनीय सफलता को रेखांकित करती है, जिसमें 3,167 की बाघ आबादी, एशियाई शेरों और गैंडों की बहाली, तथा पहला राष्ट्रीय हिम तेंदुआ आकलन शामिल है। रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तैयार की गई। इसमें 33 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों का योगदान, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा तकनीकी समन्वय, और वैश्विक पर्यावरण सुविधा GEF-8 अम्ब्रेला कार्यक्रम के अंतर्गत UNDP का सहयोग शामिल है। निष्कर्ष बताते हैं कि भारत की 2030 जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में डेटा अंतराल, सीमित संरक्षण दायरा और तेज भू-क्षरण जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।