पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक परिवर्तन
मुख्य तथ्य
- पारिस्थितिक बदलाव को जलवायु दबाव, भूमि क्षरण, जैव विविधता की हानि, आर्द्रभूमियों की स्थिति, वन आवरण, प्रदूषण और आपदा जोखिम के नज़रिए से समझा जाता है।
- पेरिस समझौता, यूएनसीसीडी, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल रूपरेखा, सेंदाई रूपरेखा और रामसर अभिसमय इस विषय का वैश्विक संदर्भ तय करते हैं।
- भारत में पर्यावरण, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और जल से जुड़े अधिनियम पारिस्थितिकी के नियमन का आधार बनाते हैं।
- राजस्थान के उदाहरणों में अरावली का क्षरण, थार का मरुस्थलीकरण, गर्मी का बढ़ता दबाव, पानी की कमी और आर्द्रभूमियों पर दबाव शामिल हैं।
- परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य वायु गुणवत्ता सूचकांक, अम्ल वर्षा वाली गैसों, सुपोषण, जैविक-अजैविक घटकों, कार्बन पदचिह्न और हरितगृह गैसों से ज...
मुख्य बिंदु
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पारिस्थितिक बदलाव को जलवायु दबाव, भूमि क्षरण, जैव विविधता की हानि, आर्द्रभूमियों की स्थिति, वन आवरण, प्रदूषण और आपदा जोखिम के नज़रिए से समझा जाता है।
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पेरिस समझौता, यूएनसीसीडी, कुनमिंग-मॉन्ट्रियल रूपरेखा, सेंदाई रूपरेखा और रामसर अभिसमय इस विषय का वैश्विक संदर्भ तय करते हैं।
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भारत में पर्यावरण, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और जल से जुड़े अधिनियम पारिस्थितिकी के नियमन का आधार बनाते हैं।
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राजस्थान के उदाहरणों में अरावली का क्षरण, थार का मरुस्थलीकरण, गर्मी का बढ़ता दबाव, पानी की कमी और आर्द्रभूमियों पर दबाव शामिल हैं।
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परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य वायु गुणवत्ता सूचकांक, अम्ल वर्षा वाली गैसों, सुपोषण, जैविक-अजैविक घटकों, कार्बन पदचिह्न और हरितगृह गैसों से जुड़े होते हैं।
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आईपीसीसी एआर6, आईएसएफआर 2023 और वैश्विक प्रवाल विरंजन की घटना इस अमूर्त बदलाव को ठोस तिथियों और आँकड़ों के रूप में सामने रखते हैं।
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पुनर्स्थापन सिर्फ़ वृक्षारोपण नहीं है; इसमें क्षरित भूमि का सुधार, आर्द्रभूमियों की बहाली, जैव विविधता रजिस्टर और जोखिम को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना भी शामिल है।
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अच्छे उत्तर में कारणों, लक्षणों, कानूनी उपायों, निगरानी संकेतकों और राजस्थान के क्षेत्रीय उदाहरणों को अलग-अलग स्पष्ट रूप से रखा जाता है।
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जलवायु दबाव और पेरिस समझौता पर्यावरणीय बदलाव को कैसे समझाते हैं?
जलवायु दबाव तापमान, वर्षा, सूखे की आवृत्ति और पारिस्थितिक तनाव को बदलता है, और पेरिस समझौता इसी दबाव को राष्ट्रीय योगदान, शमन और अनुकूलन के मापने योग्य लक्ष्यों से जोड़ता है। यूएनएफसीसी के अनुसार पेरिस समझौता 12 दिसंबर 2015 को सीओपी21 में 195 पक्षकारों ने अपनाया था, इसलिए यह वैश्विक जलवायु नीति का बड़ा आधार माना जाता है।
पर्यावरणीय परिवर्तन तब शुरू होता है जब जलवायु दबाव तापमान, वर्षा, सूखे की आवृत्ति और पारिस्थितिकी तनाव को बदल देता है।
वैश्विक जलवायु आधार
- पेरिस समझौता: 2015-12-12 को अपनाया गया।
- महत्व: वैश्विक जलवायु नीति का प्रमुख आधार है।
- जोड़: यह तापमान-लक्ष्य को राष्ट्रीय निर्धारित योगदानों के चक्र से जोड़ता है।
- लक्ष्य: 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रहने का लक्ष्य और 1.5 डिग्री तक सीमित रखने का प्रयास, पारिस्थितिक परिवर्तन को सिर्फ मौसम की कहानी नहीं रहने देते।
- प्रभाव: वे उसे शमन और अनुकूलन के पैमाने पर मापने लायक बना देते हैं।
आईपीसीसी एआर6 और जलवायु प्रभाव
- जलवायु प्रभावों पर आईपीसीसी एआर6 संश्लेषण रिपोर्ट: 2023 में अंतिम रूप से आई।
- समेकन: यह भौतिक विज्ञान, प्रभाव, अनुकूलन और शमन के निष्कर्षों को साथ रखती है।
- स्पष्टता: इसी से स्पष्ट होता है कि ताप-लहर, सूखा, भारी वर्षा और समुद्र-स्तर जोखिम केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं, बल्कि आर्थिक मुद्दे भी हैं।
राजस्थान में संकेत
| क्षेत्र | दिखाई देने वाला दबाव |
|---|---|
| पश्चिमी जिले | अधिक गर्मी |
| बाड़मेर-जैसलमेर के आसपास | चरागाह तनाव |
| जयपुर, जोधपुर तथा बीकानेर | बढ़ती जल-मांग |
जलवायु दबाव से बदलती पर्यावरणीय अवधारणाएँ
| अवधारणा | अर्थ |
|---|---|
| कार्बन पदचिह्न | उन हरितगृह गैसों को बताता है जो मानव गतिविधि से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी होती हैं। |
| अम्ल वर्षा | सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड को मृदा तथा जल रसायन से जोड़ती है। |
| अनवीकरणीय संसाधन | जीवाश्म ईंधनों को जैव-भंडार या सूर्य-प्रकाश से अलग करते हैं। |
कारण-श्रृंखला
| चरण | विवरण |
|---|---|
| हरितगृह गैसें | तापमान बढ़ाती हैं। |
| बढ़ता तापमान | आवास, जल और फसल पर तनाव बदल देता है। |
| प्रतिक्रिया | पेरिस योगदान, राज्य अनुकूलन योजनाएँ, नवीकरणीय ऊर्जा और जल-संरक्षण उपाय आते हैं। |
शमन और अनुकूलन
| पक्ष | भूमिका |
|---|---|
| शमन | स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा बचत और भूमि-उपयोग के विकल्पों से भविष्य का दबाव घटाता है। |
| अनुकूलन | पहले से तय नुकसान से लोगों, फसलों, जलाशयों और आवासों की रक्षा करता है। |
- पश्चिमी राजस्थान: दोनों पक्षों को साथ दिखाता है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: उत्सर्जन घटा सकती है।
- शुष्क जिलों की जरूरत: सूखा-योजना, ताप-आश्रय, जल-बजट और चरागाह पारिस्थितिकी की सुरक्षा भी चाहिए।
- दोहरा पाठ: जलवायु परिवर्तन को केवल तापमान या केवल आपदा-राहत तक सीमित होने से रोकता है।
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1MCQकौन-सा वैश्विक समझौता अपनाने की तिथि, मुख्य व्यवस्था और पारिस्थितिक परिवर्तन की भूमिका को सही जोड़ता है?
व्याख्या
पेरिस समझौता 12 दिसंबर 2015 को अपनाया गया और तापमान लक्ष्य से जुड़े एनडीसी चक्र पर काम करता है। रामसर 1971 का आर्द्रभूमि अभिसमय है, यूएनसीसीडी 1994 का मरुस्थलीकरण अभिसमय है और सेंदाई 2015 की आपदा जोखिम रूपरेखा है; इसलिए बाकी विकल्प वास्तविक संस्थाओं को गलत क्षेत्र में रखते हैं।
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