प्रकाशित: 3 मार्च 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की सुरक्षा के लिए नए बीज अधिनियम 2026 और संशोधित कीटनाशक अधिनियम 2026 की घोषणा की
1–4 मार्च 2026 के आसपास, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मसूरी, उत्तराखंड में दो महत्वपूर्ण कृषि सुधारों की घोषणा की — नया बीज अधिनियम 2026 और संशोधित कीटनाशक अधिनियम 2026 — जिन्हें संसद के बजट सत्र में पेश किया जाएगा और ये 1966 के पुराने बीज अधिनियम की जगह लेंगे।
नए बीज अधिनियम 2026 में सभी बीज कंपनियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड होगा, जिसे स्कैन कर किसान बीज की पूरी उत्पत्ति जान सकेंगे — उत्पादन से लेकर डीलर और खुदरा विक्रेता तक। यह देशव्यापी व्यवस्था नकली और घटिया बीजों की समस्या से निपटने के लिए है। उल्लंघनों के लिए जुर्माना मौजूदा ₹500 से बढ़ाकर ₹30 लाख तक करने का प्रस्ताव है, और जानबूझकर किए गए अपराधों पर आपराधिक दंड का भी प्रावधान है। किसानों का अपने बीज बचाने, बोने और अन्य किसानों के साथ साझा करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
संशोधित कीटनाशक अधिनियम 1968 के कीटनाशक अधिनियम की जगह लेगा और गुणवत्ता नियंत्रण व दायित्व पर कड़े नियम लागू करेगा।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयआर्थिकपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतसमाचार स्रोत
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नमध्यम
नए बीज अधिनियम और संशोधित कीटनाशक अधिनियम पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मसूरी घोषणा को News On AIR ने किस तारीख को प्रकाशित किया?
व्याख्या · सही उत्तर ANews On AIR ने यह रिपोर्ट 1 मार्च 2026 को प्रकाशित की। रिपोर्ट में बताया गया कि केंद्र सरकार बीजों की गुणवत्ता और किसानों की सुरक्षा के लिए नया बीज अधिनियम तथा संशोधित कीटनाशक अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा घोषित नए बीज अधिनियम 2026 के प्रमुख प्रावधान क्या हैं?
नया बीज अधिनियम 2026, जो 1966 के बीज अधिनियम की जगह लेगा, सभी बीज पैकेटों पर पूरी ट्रेसेबिलिटी के लिए QR कोड अनिवार्य करता है, कंपनी पंजीकरण को बाध्यकारी बनाता है और उल्लंघन पर ₹30 लाख तक जुर्माना तय करता है। यह किसानों के बीज बचाने, उपयोग करने, बोने, दोबारा बोने, आदान-प्रदान करने और बेचने के अधिकारों को स्पष्ट रूप से सुरक्षित रखता है।
बीज अधिनियम 1966 को क्यों बदला गया और इसकी प्रमुख कमियाँ क्या थीं?
बीज अधिनियम 1966 छह दशक से अधिक पुराना था और GM बीज, नकली बीज, वैश्विक बीज व्यापार और डिजिटल ट्रेसेबिलिटी जैसी आधुनिक समस्याओं से निपटने में असमर्थ था। इसमें QR कोड आधारित ट्रैकिंग का प्रावधान नहीं था, जुर्माना कमजोर था और किसानों को निजी कंपनियों के घटिया या गलत लेबल वाले बीजों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती थी।
संशोधित कीटनाशक अधिनियम 2026, कीटनाशक अधिनियम 1968 की तुलना में क्या बदलाव करता है?
संशोधित कीटनाशक अधिनियम 2026, कीटनाशक अधिनियम 1968 की जगह लेता है। इसमें बेहतर सुरक्षा मानक, रासायनिक पंजीकरण की नई प्रक्रियाएँ और जैव कीटनाशकों व एकीकृत कीट प्रबंधन को सक्रिय बढ़ावा देने के प्रावधान हैं। यह कीटनाशक कंपनियों की जवाबदेही कड़ी करता है और खतरनाक रसायनों से किसानों व उपभोक्ताओं की सुरक्षा बढ़ाता है।
वैश्विक बीज उत्पादन में भारत की क्या स्थिति है और इस क्षेत्र में राजस्थान क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बीज उत्पादक देश है, जहाँ बीज उद्योग ₹50,000 करोड़ से अधिक का है। राजस्थान प्रमाणित बीजों का प्रमुख उत्पादक है, विशेषकर सरसों, जीरा और मेथी के लिए। ये फसलें राज्य की कृषि और भारत की मसाला निर्यात अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नए बीज अधिनियम 2026 में किसानों के बीज अधिकार RPSC के कृषि नीति विषयों से कैसे जुड़े हैं?
नए बीज अधिनियम 2026 में किसानों के बीज अधिकारों की सुरक्षा, पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण (PPV&FR) अधिनियम 2001 तथा संविधान के अनुच्छेद 48 (कृषि आधुनिकीकरण पर निदेशक सिद्धांत) से जुड़ती है। RPSC के लिए यह कृषि सुधार, खाद्य सुरक्षा और राजस्थान की मुख्यतः कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था में किसानों के अधिकारों जैसे विषयों से प्रासंगिक है।