13 अप्रैल 2026 के आसपास पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की कि ई20 पेट्रोल, यानी बीस प्रतिशत एथनॉल मिला पेट्रोल, अब इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के देशभर में लगभग सभी सार्वजनिक क्षेत्र के खुदरा बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध है। देशव्यापी वितरण तक पहुँचना एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम की बड़ी उपलब्धि है। यह कार्यक्रम मूलतः वर्ष 2003 में शुरू हुआ था और वर्ष 2021 में भारत में एथनॉल मिश्रण रोडमैप 2020-25 के तहत बीस प्रतिशत मिश्रण लक्ष्य को वर्ष 2030 से आगे बढ़ाकर वर्ष 2025-26 किए जाने के बाद इसमें तेजी आई। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 (संशोधित 2022) के अंतर्गत एथनॉल के लिए फीडस्टॉक का दायरा गन्ने के शीरे से बढ़ाकर अधिशेष चीनी, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न तथा मक्का तक किया गया है। वर्तमान एथनॉल आपूर्ति वर्ष में भारत की एथनॉल खरीद रिकॉर्ड मात्रा पार कर चुकी है। इसमें तेल विपणन कंपनियों और एथनॉल उत्पादकों के बीच कीमतों की व्यवस्था, अलग-अलग फीडस्टॉक के लिए अलग मूल्य निर्धारण, एथनॉल क्षमता विस्तार के लिए ब्याज सहायिकी तथा सहकारी चीनी मिलों और निजी कंपनियों की नई डिस्टिलरियों की पाइपलाइन ने मदद की है। बताए गए लाभों में कच्चे तेल के आयात बिल में कमी, गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्यों तथा मक्का व टूटे चावल की खरीद मूल्यों के जरिए किसानों की अधिक आय, टेलपाइप से हाइड्रोकार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में कमी तथा नेट-जीरो 2070 की दिशा में प्रगति शामिल हैं। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रमुख निर्माताओं ने अप्रैल 2023 से ई20-अनुरूप वाहन प्रस्तुत किए हैं तथा पुराने वाहन छोटे-मोटे समायोजन के साथ ई20 पर सुरक्षित रूप से चल सकते हैं। पर्यावरण आलोचकों ने खाद्य-बनाम-ईंधन की संभावित चिंताओं, गन्ना-आधारित एथनॉल की जल-खपत तथा वायु गुणवत्ता से जुड़े समझौतों को रेखांकित किया है, जबकि सरकार ने डीडीजीएस, मक्का तथा फसल अवशेष से 2जी एथनॉल के उपयोग पर बल दिया है।