विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने 4 जून 2026 को 'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026: आँकड़ों में' रिपोर्ट जारी की। इसे सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने जारी किया, जो देश के पर्यावरण की सेहत का आँकड़ों पर आधारित चित्र प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 97,000 हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तित किया गया, और 26 राज्यों में वन परिवर्तन की गति बढ़ी है। जलवायु के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में भारत ने साल के 99 प्रतिशत दिनों पर चरम मौसम की घटनाएँ झेलीं। इन घटनाओं में 4,421 लोगों की मृत्यु हुई और 1 करोड़ 74.1 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुँचा, जो गरमाती जलवायु की बढ़ती मानवीय और कृषि लागत को रेखांकित करता है। जल संकट भी उतना ही गंभीर है: 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भूजल का अति-दोहन पाया गया, जहाँ पंजाब, राजस्थान और हरियाणा प्राकृतिक पुनर्भरण से अधिक भूजल निकाल रहे हैं। रिपोर्ट एक विकास विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाती है कि भारत के पाँच सबसे अधिक आबादी वाले राज्य पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य और मानव विकास के संयुक्त मानकों पर सबसे नीचे हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर सीएसई ने 'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026: आँकड़ों में' जारी की
सीएसई ने 4 जून 2026 को 'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026: आँकड़ों में' रिपोर्ट जारी की, जिसमें बड़े पैमाने पर वन परिवर्तन, वर्ष 2025 में लगभग रोज़ाना चरम मौसम, गंभीर भूजल अति-दोहन और सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों के कमज़ोर मानव विकास संकेतकों को उजागर किया गया है।
मुख्य तथ्य
- यह रिपोर्ट 4 जून 2026 को सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जारी की।
- वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 97,000 हेक्टेयर वनभूमि गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तित हुई; 26 राज्यों में वन परिवर्तन बढ़ा।
- वर्ष 2025 में भारत ने साल के 99 प्रतिशत दिनों पर चरम मौसम झेला, जिसमें 4,421 लोगों की मृत्यु हुई और 1 करोड़ 74.1 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र क्षतिग्रस्त हुआ।
- 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भूजल का अति-दोहन हुआ; पंजाब, राजस्थान और हरियाणा पुनर्भरण से अधिक भूजल निकाल रहे हैं।
- भारत के पाँच सबसे अधिक आबादी वाले राज्य पर्यावरण, कृषि, स्वास्थ्य और मानव विकास के मानकों पर सबसे नीचे हैं।
6-अक्ष वर्गीकरण
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र द्वारा जारी 'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026: आँकड़ों में' रिपोर्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 97,000 हेक्टेयर वनभूमि को गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तित किया गया। 2. यह रिपोर्ट विश्व जल दिवस की पूर्व संध्या पर जारी की गई थी। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
कथन 1 सही है: रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच लगभग 97,000 हेक्टेयर वनभूमि गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तित हुई। कथन 2 गलत है: यह रिपोर्ट 4 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जारी हुई थी, न कि विश्व जल दिवस की। अतः केवल कथन 1 सही है।
स्रोत: Down To Earth
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026: आँकड़ों में' रिपोर्ट किसने और कब जारी की?
इसे विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने 4 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर जारी किया।
वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कितनी वनभूमि परिवर्तित हुई?
लगभग 97,000 हेक्टेयर वनभूमि गैर-वन उपयोग के लिए परिवर्तित हुई और 26 राज्यों में वन परिवर्तन बढ़ा।
रिपोर्ट ने वर्ष 2025 के चरम मौसम के बारे में क्या बताया?
भारत ने साल के 99 प्रतिशत दिनों पर चरम मौसम झेला, जिसमें 4,421 लोगों की मृत्यु हुई और 1 करोड़ 74.1 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुँचा।
कौन-से राज्य पुनर्भरण से अधिक भूजल निकाल रहे हैं?
पंजाब, राजस्थान और हरियाणा प्राकृतिक पुनर्भरण से अधिक भूजल निकाल रहे हैं; कुल मिलाकर 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भूजल का अति-दोहन हो रहा है।
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