सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ पत्रिका ने 19 नवंबर 2025 को जलवायु भारत 2025 रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत भर में चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता से जुड़े चिंताजनक आँकड़े सामने आए। रिपोर्ट में पाया गया कि 2025 के पहले 9 महीनों में 99% दिनों में चरम मौसम की घटनाएं हुईं।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष ये हैं: सितंबर 2025 भारत के लिए 7वां सबसे अधिक औसत तापमान दर्ज करने वाला महीना रहा; लू, बाढ़ और सूखे का अभूतपूर्व संयोजन एक साथ दिखा; असम, बिहार और राजस्थान में विनाशकारी मानसूनी बाढ़ आई; और महाराष्ट्र, कर्नाटक में सूखे की स्थिति रही।

यह रिपोर्ट RPSC RAS परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पर्यावरणीय जोखिमों का आँकड़ों पर आधारित विश्लेषण देती है। राजस्थान के संदर्भ में खास तौर पर, अत्यधिक गर्मी, अनिश्चित मानसून पैटर्न और अचानक बाढ़ तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट में बेहतर प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, हीट एक्शन प्लान, शहरों में ऊष्मा-द्वीप प्रभाव घटाने और जलवायु के अनुकूल कृषि प्रथाओं सहित तत्काल जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की मांग की गई है।