प्रकाशित: 3 अप्रैल 2026Down to Earthपर्यावरण
भारत ने संशोधित NDC प्रस्तुत किया: 2035 तक उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती और 60% स्वच्छ ऊर्जा
भारत ने UNFCCC को अपना संशोधित NDC प्रस्तुत किया है, जिसमें 2031–2035 की अवधि के लिए महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य तय किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को इन लक्ष्यों को मंजूरी दी।
संशोधित NDC में भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह 2022 के 45 प्रतिशत से अधिक महत्वाकांक्षी है। 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने और 3.5 से 4 अरब टन CO2 समतुल्य का कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
भारत की प्रगति उल्लेखनीय है: 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की गिरावट आई, फरवरी 2026 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 52.57 प्रतिशत क्षमता तक पहुंच गई है, और 2021 तक 2.3 अरब टन CO2 समतुल्य कार्बन सिंक बना है।
यह भारत का पेरिस समझौते के तहत तीसरा NDC है और इसमें पंचामृत जलवायु योजना की झलक मिलती है। भारत का दीर्घकालिक नेट-जीरो लक्ष्य 2070 है। जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण विकसित देशों से भारत की प्रमुख माँगें हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NDC क्या है?
NDC (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान) वह जलवायु कार्ययोजना है जिसे कोई देश पेरिस समझौते के तहत UNFCCC को प्रस्तुत करता है।
2035 के लिए भारत ने उत्सर्जन तीव्रता का क्या लक्ष्य रखा है?
भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता 47% घटाने की प्रतिबद्धता जताई है।
पंचामृत क्या है?
पंचामृत COP26 में घोषित भारत की पाँच-सूत्री जलवायु प्रतिबद्धता है: 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता, 50% नवीकरणीय ऊर्जा, 1 अरब टन उत्सर्जन कटौती, उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी, और 2070 तक नेट-जीरो।
भारत का नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष क्या है?
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है।
भारत अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में कैसा प्रदर्शन कर रहा है?
भारत अपने लक्ष्यों से आगे है: 2020 तक उत्सर्जन तीव्रता 36% घटी, गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी क्षमता में 52.57% है, और कार्बन सिंक 2.3 अरब टन CO2 समतुल्य है।