भारत ने UNFCCC को अपना संशोधित NDC प्रस्तुत किया है, जिसमें 2031–2035 की अवधि के लिए महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य तय किए गए हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 25 मार्च 2026 को इन लक्ष्यों को मंजूरी दी।

संशोधित NDC में भारत ने 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 47 प्रतिशत तक कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह 2022 के 45 प्रतिशत से अधिक महत्वाकांक्षी है। 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने और 3.5 से 4 अरब टन CO2 समतुल्य का कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

भारत की प्रगति उल्लेखनीय है: 2005 से 2020 के बीच उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की गिरावट आई, फरवरी 2026 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 52.57 प्रतिशत क्षमता तक पहुंच गई है, और 2021 तक 2.3 अरब टन CO2 समतुल्य कार्बन सिंक बना है।

यह भारत का पेरिस समझौते के तहत तीसरा NDC है और इसमें पंचामृत जलवायु योजना की झलक मिलती है। भारत का दीर्घकालिक नेट-जीरो लक्ष्य 2070 है। जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण विकसित देशों से भारत की प्रमुख माँगें हैं।