25 मार्च 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने पेरिस समझौते के तहत UNFCCC को सूचित किए जाने वाले भारत के 2031–2035 के संशोधित राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दी। यह 28 मार्च की करंट अफेयर्स चर्चा का प्रमुख विषय रहा।

संशोधित NDC में तीन मात्रात्मक लक्ष्य हैं: (1) 2005 के आधार वर्ष से 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी — पहले का लक्ष्य 45% था। भारत 2005-2020 के बीच पहले ही 36% कमी हासिल कर चुका है। (2) 2035 तक कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से — फरवरी 2026 तक भारत पहले ही 52.57% तक पहुंच चुका है। (3) वन और वृक्ष आवरण से 3.5-4 अरब टन CO₂ समकक्ष का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना।

दीर्घकालिक लक्ष्य 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन है। नीति आयोग के दस कार्यकारी समूहों से परामर्श के बाद ये लक्ष्य तय किए गए।

राजस्थान की भूमिका: क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान, नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है — सौर ऊर्जा में सर्वाधिक स्थापित क्षमता (22 GW से अधिक) के साथ। भारत के NDC लक्ष्यों की प्राप्ति राजस्थान के थार रेगिस्तान में सौर और पवन ऊर्जा विस्तार पर काफी निर्भर है।