विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (CSE) और डाउन टू अर्थ पत्रिका ने 25 फरवरी 2026 को अनिल अग्रवाल संवाद 2026 के अवसर पर अपने प्रमुख वार्षिक प्रकाशन — स्टेट ऑफ इंडियाज़ एन्वायरनमेंट (SoE) 2026 रिपोर्ट — का आधिकारिक विमोचन किया। यह रिपोर्ट भारत की समग्र पर्यावरणीय स्थिति का व्यापक और विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करती है तथा जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों और पारिस्थितिक क्षरण की चिंताजनक प्रवृत्तियों को साफ़ तौर पर रेखांकित करती है। सबसे चौंकाने वाले निष्कर्षों में, भारत में 2025 में 334 दिनों में से 331 दिनों पर चरम मौसमी घटनाएँ दर्ज की गईं — यानी लगभग 99% दिनों में देश में कहीं न कहीं कम से कम एक चरम मौसमी घटना अवश्य हुई। वर्ष 2025 में चरम मौसमी घटनाओं के कारण कम से कम 4,419 लोगों ने अपनी जान गँवाई, जो पिछले वर्षों की तुलना में तेज़ और चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है। रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी दी गई है कि मानवीय गतिविधियों के कारण 9 ग्रहीय सीमाओं में से 7 का उल्लंघन हो चुका है, जिसमें समुद्री अम्लीकरण अब सातवीं उल्लंघित सीमा के रूप में सामने आया है। शेष छह उल्लंघित सीमाओं में जलवायु परिवर्तन, जैवमंडल की अखंडता, भूमि प्रणाली परिवर्तन, मीठे पानी का ह्रास, जैव-रासायनिक प्रवाह और नवीन पदार्थ शामिल हैं। 2026 संस्करण में बदलती जलवायु में बाढ़ की समस्या, गरीबी और पर्यावरण का गहरा अंतर्संबंध, पर्यावरण प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, जनसंख्या ह्रास की प्रवृत्तियाँ और पर्यावरणीय मुद्दों में युवा भागीदारी जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों को विस्तार से शामिल किया गया है। यह रिपोर्ट जलवायु अनुकूलन को सुदृढ़ करने, स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण तेज़ करने, जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारत की समग्र विकास योजना में पर्यावरणीय स्थिरता को पूरी तरह शामिल करने के लिए तत्काल और प्रभावी नीतिगत कार्रवाई का आह्वान करती है। यह नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज़ है।