पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो 31 मार्च 2026 से प्रभावी हैं। ये नियम भारत में प्लास्टिक अपशिष्ट के लिए विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (EPR) ढाँचे में व्यापक बदलाव लाते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव उत्पादकों के लिए पुनर्चक्रित सामग्री के अनिवार्य लक्ष्यों की शुरुआत है। कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग में 2026-27 तक 30% पुनर्चक्रित सामग्री शामिल करनी होगी, जो 2028-29 तक 60% तक बढ़ेगी। यह कदम पुनर्चक्रित प्लास्टिक की माँग बढ़ाने और पुनर्चक्रण व्यवस्था को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए है।

संशोधन में कार्बन क्रेडिट बाजारों के मॉडल पर एक प्लास्टिक क्रेडिट ट्रेडिंग सिस्टम शुरू किया गया है। जो उत्पादक अपनी EPR बाध्यताओं से अधिक उपलब्धि हासिल करते हैं, वे प्लास्टिक क्रेडिट उत्पन्न कर सकते हैं और उन्हें उन उत्पादकों को बेच सकते हैं जो अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाते।

3-वर्षीय कैरीफॉर्वर्ड प्रावधान उत्पादकों को अपूर्ण EPR लक्ष्यों को अगले वित्तीय वर्षों में ले जाने की अनुमति देता है। पंजीकृत पर्यावरण लेखा परीक्षकों (REA) की अनिवार्य नियुक्ति के ज़रिए डिजिटल ट्रैकिंग को मजबूत किया गया है। राजस्थान के लिए ये नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, जहाँ जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में प्रमुख प्लास्टिक विनिर्माण क्लस्टर हैं।