केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का NDC 2031–2035 मंजूर किया: 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती, 60% गैर-जीवाश्म बिजली लक्ष्य
Aसीधा उत्तर
25 मार्च 2026 को मंत्रिमंडल से मंजूर भारत का NDC 2031–2035, 2035 तक GDP उत्सर्जन तीव्रता में 47% कमी, 60% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 3.5–4 अरब टन CO2 समतुल्य कार्बन सिंक का लक्ष्य तय करता है — नेट जीरो 2070 लक्ष्य के अनुरूप।
मुख्य तथ्य
25 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का संशोधित NDC (राष्ट्रीय निर्धारित योगदान) 2031–2035 मंजूर किया।
प्रमुख लक्ष्य: 2005 आधार वर्ष की तुलना में 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% कमी।
गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता लक्ष्य: 2035 तक कुल स्थापित क्षमता का 60%।
कार्बन सिंक लक्ष्य: 2035 तक वन एवं वृक्ष आवरण से 3.5–4 अरब टन CO2 समतुल्य।
NDC पेरिस समझौते (2015) के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएं हैं; इन्हें हर 5 वर्ष में UNFCCC को जमा किया जाता है।
पिछले NDC (2021–2030) के लक्ष्य (45% उत्सर्जन तीव्रता कटौती, 50% गैर-जीवाश्म क्षमता) समय से पहले हासिल कर लिए गए; दीर्घकालिक लक्ष्य: नेट जीरो 2070 (COP26 ग्लासगो में घोषित)।
25 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2031–2035 की अवधि के लिए भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) मंजूर किया, जो UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत भारत की जलवायु महत्वाकांक्षा को मजबूत करता है।
प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं: (1) 2005 के स्तर की तुलना में 2035 तक भारत की GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी; (2) 2035 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 60% स्थापित बिजली क्षमता — फरवरी 2026 तक भारत ने 52.57% गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल कर ली है; (3) 2035 तक वन और वृक्षावरण से 3.5–4.0 अरब टन CO2 समतुल्य तक कार्बन सिंक बढ़ाना। 2005–2020 के दौरान भारत की उत्सर्जन तीव्रता में पहले ही 36% की कमी आ चुकी है।
यह NDC 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य के अनुरूप है। राजस्थान में 22 GW से अधिक की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है और राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 के तहत परियोजनाएं चल रही हैं।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
RAS 2023 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) को भारत द्वारा प्रस्तुत अद्यतन राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) की संक्षेप में विवेचना कीजिए। — यह प्रश्न भारत की पूर्व एनडीसी पर आधारित है; यह लेख मार्च 2026 में स्वीकृत एनडीसी 2031-2035 लक्ष्यों के साथ उसे अद्यतन करता है।
RAS 2021 राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 की दृष्टि एवं प्रमुख उद्देश्य लिखिए। — यह प्रश्न राजस्थान सौर ऊर्जा नीति 2019 पर आधारित है; यह लेख इस राज्य नीति को 2035 तक 60% गैर-जीवाश्म क्षमता के उन्नत राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के उन्नत एनडीसी 2031-2035 लक्ष्यों का मूल्यांकन कीजिए तथा पेरिस समझौते एवं नेट ज़ीरो 2070 दृष्टिकोण के अंतर्गत गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता लक्ष्य की प्राप्ति में राजस्थान की रणनीतिक भूमिका पर विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय कैबिनेट ने 25 मार्च 2026 को एनडीसी 2031-2035 स्वीकृत की: 2035 तक 2005 से जीडीपी उत्सर्जन तीव्रता में 47% कटौती, 60% गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता (फरवरी 2026 में 52.57%), 3.5-4 अरब टन कार्बन सिंक। यह नेट ज़ीरो 2070 के अनुरूप है; राजस्थान की 22 गीगावाट नवीकरणीय क्षमता प्रमुख भूमिका निभाती है।
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25 मार्च 2026 को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित भारत का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान UNFCCC को किस अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौते के तहत भेजा जाता है?
व्याख्या · सही उत्तर A
भारत का 2031-35 राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान पेरिस समझौते के तहत UNFCCC को भेजने के लिए मंजूर किया गया था। पेरिस समझौते में ही देश अपने NDC जमा और अपडेट करते हैं, इसलिए विकल्प A सही है।
भारत का NDC 2031–2035 क्या है और इसके तीन मुख्य लक्ष्य क्या हैं?
भारत के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) 2031–2035 को 25 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी। यह पेरिस समझौते (2015) के तहत 2031–2035 दशक के लिए भारत की संशोधित जलवायु कार्ययोजना है। इसके तीन मुख्य लक्ष्य हैं: (1) 2005 आधार वर्ष की तुलना में 2035 तक GDP उत्सर्जन तीव्रता में 47% कमी; (2) 2035 तक कुल स्थापित बिजली क्षमता का 60% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से; और (3) वन एवं वृक्ष आवरण से 3.5–4 अरब टन CO2 समतुल्य का कार्बन सिंक बनाना।
राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) क्या है और पेरिस समझौते के ढाँचे में इसकी क्या भूमिका है?
राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) पेरिस समझौते (2015) के तहत प्रत्येक देश की अपनी जलवायु कार्ययोजना है, जिसे UNFCCC को सौंपा जाता है। देशों को हर पाँच साल में पहले से अधिक महत्वाकांक्षी NDC जमा करने होते हैं। पेरिस समझौते का लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2°C से काफी नीचे रखना है। भारत का NDC उत्सर्जन कटौती, स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और कार्बन अवशोषण के मामले में भारत का योगदान रेखांकित करता है।
NDC 2031–2035 की पिछले NDC 2021–2030 से तुलना कैसी है और क्या भारत ने पहले के लक्ष्य हासिल किए?
भारत के पिछले NDC (2021–2030) में 2030 तक GDP उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी और 50% गैर-जीवाश्म बिजली क्षमता का लक्ष्य था। भारत ने दोनों लक्ष्य समय से पहले हासिल कर अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं पर भरोसा मजबूत किया। नए NDC 2031–2035 में लक्ष्य और ऊंचे किए गए हैं: उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य 47% और गैर-जीवाश्म क्षमता 60% हो गई। दीर्घकालिक लक्ष्य 2070 तक नेट जीरो ही रहता है, जैसा COP26 ग्लासगो (2021) में घोषित हुआ था।
'GDP उत्सर्जन तीव्रता' का क्या मतलब है और भारत इसे अपने जलवायु लक्ष्य के रूप में क्यों इस्तेमाल करता है?
GDP उत्सर्जन तीव्रता का अर्थ है प्रति इकाई GDP (आर्थिक उत्पादन) पर उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा। इसमें कमी का मतलब है कि अर्थव्यवस्था बढ़ते हुए भी प्रति इकाई उत्पादन पर कम कार्बन उत्सर्जित कर रही है। भारत इस पैमाने का उपयोग करता है — कुल उत्सर्जन पर पूर्ण सीमा लगाने की बजाय — क्योंकि एक विकासशील देश के रूप में ऐसी पूर्ण सीमा विकास को बाधित करेगी। यह अंतर्राष्ट्रीय जलवायु कानून के 'साझी लेकिन विभेदित जिम्मेदारियाँ' (CBDR) सिद्धांत के अनुरूप है।
भारत का नेट जीरो 2070 लक्ष्य क्या है और NDC 2031–2035 इसे हासिल करने में कैसे मदद करता है?
भारत ने नवंबर 2021 में COP26 ग्लासगो में 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का संकल्प लिया। नेट जीरो का अर्थ है कि भारत का कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, वायुमंडल से हटाई गई कार्बन की मात्रा (वनों, कार्बन कैप्चर आदि से) से संतुलित होगा। NDC 2031–2035 इस लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है: उत्सर्जन तीव्रता घटाकर, गैर-जीवाश्म बिजली 60% तक बढ़ाकर और 3.5–4 अरब टन कार्बन सिंक बनाकर भारत 2070 तक नेट जीरो की दिशा में अपने उत्सर्जन की रफ्तार कम कर रहा है।
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