भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन ने मार्च 2026 के अंत में अपने ऑसिलेशन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए। यह भारत की हरित रेलवे पहल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (RDSO) द्वारा आयोजित ट्रायल के सफल समापन की घोषणा की।

यह ट्रेन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई — भारतीय रेलवे की एक प्रमुख उत्पादन इकाई — द्वारा पूरी तरह डिज़ाइन और निर्मित की गई है। यह हरियाणा में जींद–सोनीपत रूट पर 90 किलोमीटर के गैर-विद्युतीकृत खंड पर चलती है। डीजल के स्वच्छ विकल्पों के परीक्षण के लिए इस गैर-विद्युतीकृत खंड को उपयुक्त माना गया।

ऑसिलेशन ट्रायल के दौरान ट्रेन ने अधिकतम 70 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से 20 किलोमीटर की दूरी तय की। ट्रेन की ईंधन सेलें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच विद्युत-रासायनिक अभिक्रिया से बिजली पैदा करती हैं, जिससे केवल जल-वाष्प निकलती है — यानी शून्य कार्बन उत्सर्जन। व्यावसायिक संचालन में यह ट्रेन 110 किमी/घंटा तक की गति हासिल कर सकती है।

ट्रेनसेट में 10 कोच — 8 यात्री कोच और 2 ड्राइविंग पावर कार — हैं, जिनकी संयुक्त शक्ति 2,400 किलोवाट है। जींद में हरित हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए एक हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र भी स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन और भारत की 2070 तक नेट-ज़ीरो प्रतिबद्धता के अनुरूप है।