केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने 1 अप्रैल 2026 को ओडिशा सरकार को पुरी में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए प्रथम चरण की वन स्वीकृति के निर्णय की सूचना दी। इस सप्ताह इसे ओडिशा के धरोहर पर्यटन के लिए बड़े प्रोत्साहन के रूप में व्यापक चर्चा मिल रही है। मंत्रालय ने वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत पुरी वन प्रभाग के अंतर्गत 27.887 हेक्टेयर वन भूमि को हवाई अड्डे के निर्माण के लिए डायवर्ट करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। पूरा हवाई अड्डा कुल 471.34 हेक्टेयर क्षेत्र पर प्रस्तावित है, जिसमें से लगभग 27.886 हेक्टेयर ही वन क्षेत्र से डायवर्ट किया जा रहा है। यह प्रथम चरण की मंजूरी पुरी के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तट की रक्षा के उद्देश्य से कई अनिवार्य सुरक्षा उपायों के साथ दी गई है। इनमें ऑलिव रिडले कछुओं के घोंसले स्थलों तथा प्रवासी पक्षियों के आवासों की सुरक्षा के लिए निर्दिष्ट आवास गलियारे, प्रकाश प्रदूषण नियंत्रण और ओडिशा में अन्यत्र चिन्हित स्थलों पर क्षतिपूरक वनरोपण जैसी विशिष्ट शर्तें शामिल हैं। अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि जहाँ भी संभव हो वृक्षों को काटने के बजाय उनका स्थानांतरण किया जाए और कटाई केवल राज्य वन विभाग की निगरानी में ही हो। स्वीकृति में डायवर्ट की गई वन भूमि के भीतर श्रमिक शिविर स्थापित करने पर भी रोक लगाई गई है, और आसपास के वन क्षेत्रों पर दबाव न पड़े, इसके लिए ईंधन एवं ऊर्जा की व्यवस्था पहले से करनी होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि वास्तविक निर्माण तब तक शुरू नहीं हो सकता जब तक केंद्र अनुपालन सत्यापन के बाद द्वितीय चरण की अंतिम मंजूरी प्रदान नहीं कर देता। अधिकारियों का अनुमान है कि संचालन 2029-2030 तक शुरू हो सकता है और यह हवाई अड्डा तीर्थ पर्यटन का बड़ा विस्तार करेगा, क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बल देगा तथा भुवनेश्वर हवाई अड्डे पर भीड़ कम करेगा।