भारत के चाबहार बंदरगाह (ईरान) से जुड़ी रणनीतिक परियोजना एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंध छूट — जिसके तहत भारत शहीद बेहेश्ती टर्मिनल संचालित कर सकता है — 26 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाली है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि छूट बढ़ाने के लिए वाशिंगटन से सक्रिय बातचीत चल रही है।

पृष्ठभूमि: भारत का चाबहार निवेश

  • भारत इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) से ईरान के चाबहार बंदरगाह पर शहीद बेहेश्ती टर्मिनल संचालित करता है।
  • भारत ने चाबहार परियोजना में लगभग $50 करोड़ निवेश किया है — यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक पहुंचने का रणनीतिक मार्ग है, जिसमें पाकिस्तान को दरकिनार किया जाता है।

प्रतिबंध इतिहास और वर्तमान छूट

  • अमेरिका ने 2018 में ईरान स्वतंत्रता और प्रसार-निरोधक अधिनियम (IFCA) के तहत भारत को प्रतिबंध छूट दी थी।
  • 16 सितंबर 2025 को अमेरिकी विदेश विभाग ने मूल 2018 छूट रद्द की — ट्रंप के 'अधिकतम दबाव' अभियान के तहत।
  • भारत-अमेरिका चर्चा के बाद अमेरिकी OFAC ने 26 अप्रैल 2026 तक सशर्त छूट जारी की।

भारत की वित्तीय स्थिति

  • भारत ने सितंबर 2025 में प्रतिबंध फिर लागू होने से पहले लगभग $12 करोड़ की पूरी वित्तीय प्रतिबद्धता ईरान को हस्तांतरित कर दी।
  • विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पुष्टि की कि भारत पर परियोजना से जुड़ी कोई और वित्तीय जिम्मेदारी नहीं है।

MEA की वर्तमान स्थिति

  • MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि भारत 26 अप्रैल की समयसीमा से पहले समाधान के लिए "सभी संबंधित पक्षों से संपर्क में" है।
  • भारत ने पूर्ण वापसी की रिपोर्टों का खंडन किया और इसे "रणनीतिक पुनर्समीक्षा" बताया।