भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग पर भारत-उज्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग (आईजीसी) के 14वें सत्र की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने उज्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग और व्यापार उपमंत्री शोखरुख गुलामोव के साथ इस बैठक की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक ताशकंद में आयोजित हुई, जिसमें भारतीय सह-अध्यक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया। आयोग ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की रणनीतिक प्रकृति की पुनः पुष्टि की, जो ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के नेतृत्व में और मजबूत हुई है। दोनों पक्षों ने व्यापार को और मजबूत करने, गैर-शुल्कीय बाधाओं को दूर करने तथा अगले तीन वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति जताई। वाणिज्य सचिव ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु एवं सेवा निर्यात 860.09 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि अप्रैल-मई 2026-27 के दौरान संचयी निर्यात 162.69 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 14.66 प्रतिशत अधिक है तथा वस्तु निर्यात में 16.09 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उज्बेकिस्तान ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत के साथ उसका व्यापार कारोबार 33.3 प्रतिशत बढ़कर 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। आयोग ने औषधि, कृषि, इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारतीय आपूर्ति के विस्तार पर चर्चा की और ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण खनिजों को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। यह निर्णय लिया गया कि आईजीसी की 15वीं बैठक भारत में आयोजित की जाएगी।