भारत और यूरोपीय संघ ने टिकाऊ जहाज पुनर्चक्रण में सहयोग मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा पर्यावरण, जल लचीलापन एवं प्रतिस्पर्धी सर्कुलर अर्थव्यवस्था के लिए यूरोपीय आयुक्त जेसिका रोसवाल के बीच बातचीत में दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ के जहाज पुनर्चक्रण नियमन (ईयूएसआरआर) के तहत मान्यता चाहने वाले भारतीय यार्डों की ऑडिट एवं अनुपालन प्रक्रिया की समीक्षा की। तीस से अधिक भारतीय यार्डों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, छह अनुपालन एवं मंजूरी की प्रक्रिया में हैं, तथा तीन सुविधाओं ने सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर ली हैं और अब ईयू ढांचे के तहत आवेदन के योग्य हैं। यूएनसीटीएडी के अनुसार वैश्विक जहाज पुनर्चक्रण में भारत की हिस्सेदारी 2024 के 30.1% से बढ़कर 2025 में 35.4% हो गई। भारत ने 2025 में 29.9 लाख सकल टन (जीटी) जहाजों का पुनर्चक्रण किया, जो 2024 के 18.6 लाख जीटी की तुलना में लगभग 60% अधिक है। सोनोवाल ने कहा कि भारत का लक्ष्य अगले दशक में लगभग 16,000 जहाजों का पुनर्चक्रण करना है और उसने इस क्षेत्र के विकास हेतु 8 अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की है। भारतीय सुविधाओं को अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, रेड क्रॉस सोसाइटी समर्थित बहु-विशेषज्ञता स्वास्थ्य सेवा तथा कर्मचारी आवास जैसे मजबूत पर्यावरण अवसंरचना एवं कल्याण उपायों का समर्थन प्राप्त है, साथ ही समय-समय पर और बिना बताए निरीक्षण होते हैं। आयुक्त रोसवाल ने प्रगति का स्वागत करते हुए एक संयुक्त कार्यकारी समूह (जेडब्ल्यूजी) बनाने का प्रस्ताव रखा और कहा कि ईयू का नजरिया भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते तथा हांगकांग अंतरराष्ट्रीय संधि के अनुरूप है।