नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अशोक कुमार लाहिड़ी ने 23 जून 2026 को नई दिल्ली में ट्रेड वॉच क्वार्टरली का आठवां संस्करण जारी किया, जो वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) को समर्पित है। यह प्रकाशन ऐसे समय में वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का आकलन प्रस्तुत करता है, जब आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद वैश्विक व्यापार ने मज़बूती दिखाई है। भारत का व्यापार व्यापक रूप से स्थिर रहा और अप्रैल–मार्च, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल वस्तु एवं सेवा व्यापार में वर्ष-दर-वर्ष 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 1.84 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें निर्यात में 4.2 प्रतिशत तथा आयात में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि रही। सेवा व्यापार मज़बूती का प्रमुख आधार रहा, जहाँ सेवा निर्यात में 9.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और मज़बूत अधिशेष बना रहा। भारत ने वर्ष 2025 में विश्व के आठवें सबसे बड़े सेवा निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी तथा 2015 से 2025 के दौरान सेवा निर्यात में 10.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की, जो वैश्विक औसत से अधिक है। इस संस्करण का मुख्य विषय भारत का औषध क्षेत्र है। वर्ष 2025 में वैश्विक औषधि एवं सक्रिय औषधीय संघटक (एपीआई) की मांग लगभग 1.3 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर आंकी गई, जबकि भारत ने 35.8 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के औषधि एवं एपीआई उत्पादों का निर्यात किया। भारत की निर्यात क्षमता मुख्यतः फॉर्म्युलेशन्स और जेनेरिक दवाओं पर केंद्रित है, जबकि बायोलॉजिक्स जैसे उच्च-मूल्य क्षेत्रों में भागीदारी सीमित है। कच्चे माल के लिए भारत आयात, विशेषकर चीन पर निर्भर है। तेलंगाना, गुजरात और महाराष्ट्र इस उद्योग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं।