भारत और यूके ने बुधवार को घोषणा की कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) तथा इसके साथ जुड़ा सामाजिक सुरक्षा समझौता, जिसे दोहरे अंशदान समझौते (DCC) के नाम से भी जाना जाता है, दोनों देशों द्वारा अनुसमर्थन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा। भारत-यूके आर्थिक साझेदारी ढाँचे के तहत हस्ताक्षरित ये समझौते द्विपक्षीय व्यापार को गहरा करने और पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने की दिशा में बढ़ने की उम्मीद हैं। भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि CETA भारत की 99% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्क-मुक्त पहुँच देगा और भारतीय निर्यातकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह सौदा पुरानी टैरिफ दीवारों को गिरा देगा। प्रसंस्कृत खाद्य पर 70% तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5%, इंजीनियरिंग वस्तुओं एवं ऑटो कलपुर्जों पर 18%, चमड़ा एवं जूते पर 16%, वस्त्र पर 12% तथा रसायन एवं फार्मा पर 8% तक के शुल्क शून्य कर दिए जाएँगे। डेयरी, अनाज, बाजरा, खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को रियायतों से संरक्षित रखा गया है। यूके ने निर्यात हित के 137 उप-क्षेत्रों को कवर करने वाला सेवा पैकेज दिया है। लगभग 1,800 भारतीय रसोइयों, योग प्रशिक्षकों और शास्त्रीय संगीतकारों को सालाना समर्पित आवाजाही मिलेगी। DCC अस्थायी रूप से यूके में तैनात भारतीय पेशेवरों को दोहरे अंशदान से छूट देगा और छूट अवधि तीन से बढ़ाकर पाँच वर्ष कर दी गई है, जिससे 75,000 से अधिक पेशेवरों और 900 कंपनियों को लाभ होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।