विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 17 जून को भूटान के पारो में 'State of the Climate in Asia 2025' रिपोर्ट जारी की, जिसमें चेतावनी दी गई कि हाल के दशकों में एशिया वैश्विक औसत से तेज़ी से गर्म हुआ है। 1991 से 2025 के बीच गर्म होने की रफ़्तार 1961 से 1990 के मुक़ाबले लगभग दोगुनी रही। 2025 में महाद्वीप ने तीव्र गर्मी, सूखा, पीछे हटते हिमनद, ऊँचा समुद्री तापमान और समुद्री ताप-लहरों का सामना किया, जिससे पहले से चेतावनी देने और मिल-जुलकर क्षेत्रीय कदम उठाने की ज़रूरत साफ़ हुई। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय मौसम एवं जल विज्ञान सेवाओं, अंतरराष्ट्रीय आँकड़ा केंद्रों और संयुक्त राष्ट्र भागीदारों के सहयोग से तैयार की गई। इसके सह-प्रमुख लेखक भारत मौसम विज्ञान विभाग के Sreejith Op और चीन मौसम विज्ञान प्रशासन के Peiqun Zhang हैं। ऊँचे पहाड़ी एशिया के सभी 23 निगरानी वाले हिमनदों ने औसत से ज़्यादा तापमान और औसत से कम सर्दियों की बर्फ़बारी के कारण अपना द्रव्यमान घटाया, जिससे लंबे समय की जल सुरक्षा पर ख़तरा मंडराया। समुद्र में जमा ऊष्मा ने 2025 में नया रिकॉर्ड बनाया और समुद्र का स्तर 1999 के बाद सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचा। भारतीय उपमहाद्वीप के तटों पर 1999-2025 के दौरान समुद्र का स्तर हर साल 4.9 मिमी बढ़ा, जो वैश्विक औसत 3.6 मिमी प्रति वर्ष से ज़्यादा है। पाकिस्तान में बाढ़ से 1,037 मौतें हुईं और चक्रवात Ditwah ने नवंबर में श्रीलंका में 640 लोगों की जान ली।