भारत पर्यावरण की स्थिति (SoE) 2026 रिपोर्ट, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और पत्रिका डाउन टू अर्थ द्वारा जारी, भारत के पारिस्थितिक स्वास्थ्य पर चिंताजनक निष्कर्ष प्रस्तुत करती है।

प्रमुख निष्कर्ष: ग्रहीय सीमाएं

  • मानवीय गतिविधियों के कारण 9 में से 7 ग्रहीय सीमाएं पार हो चुकी हैं।
  • उल्लंघित सात सीमाएं हैं: जलवायु परिवर्तन, जीवमंडल अखंडता, भूमि प्रणाली परिवर्तन, ताजे पानी की कमी, जैव-रासायनिक प्रवाह, नए तत्व, और महासागर अम्लीकरण
  • महासागर अम्लीकरण सातवीं उल्लंघित ग्रहीय सीमा के रूप में सामने आया है।

2025 में चरम मौसम

  • भारत में 2025 में 99% दिनों में चरम मौसमी घटनाएं हुईं — पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक।
  • इनमें हीटवेव, कोल्ड वेव, भारी वर्षा, चक्रवात और बाढ़ शामिल।
  • चरम मौसम से 2025 में 4,419 मौतें हुईं।

वायु गुणवत्ता निगरानी की कमी

  • केवल 15% भारतीय आबादी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र के 10 किमी के दायरे में रहती है।
  • 85% लोग — विशेषकर छोटे शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में — निगरानी से बाहर हैं।

मानव-बाघ संघर्ष

  • रिपोर्ट में बाघ अभयारण्यों के पास मानव मृत्यु में वृद्धि बताई गई।
  • जनवरी-जून 2025 के बीच बाघ हमलों में कम से कम 43 लोगों की मौत हुई।

बाढ़ जोखिम और जलवायु लचीलापन

  • जलवायु परिवर्तन से बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है
  • रिपोर्ट में आपदा राहत से आगे बढ़कर पहले से तैयार लचीली योजना अपनाने का आह्वान किया गया है।