प्रकाशित: 26 अक्टूबर 2025Down to Earth / NGTपर्यावरण
NGT ने कृषि मंत्रालय को धान के खेतों से N2O उत्सर्जन पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भारत में धान के खेतों से नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) उत्सर्जन पर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अधिकरण ने एक ऐसी याचिका पर कार्यवाही की, जिसमें अनियंत्रित कृषि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, विशेषकर धान की खेती से होने वाले उत्सर्जन के गंभीर जलवायु प्रभावों को रेखांकित किया गया है।
N2O 100 वर्ष की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की तुलना में लगभग 300 गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। CO2 के विपरीत, N2O समताप मंडल की ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाती है, जिससे इसका पर्यावरणीय नुकसान और बढ़ जाता है। भारत विश्व के सबसे बड़े चावल उत्पादकों में से एक है और उसके विशाल धान खेती क्षेत्रों में नाइट्रोजन उर्वरकों के प्रयोग तथा जलमग्न खेतों में सूक्ष्मजीव गतिविधि से बड़ी मात्रा में N2O उत्सर्जित होती है।
NGT ने विशेष रूप से कृषि मंत्रालय से धान के खेतों से N2O उत्सर्जन कम करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित छह रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत करने को कहा है। इन ICAR रणनीतियों में शामिल हैं: फसल की जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन आपूर्ति; खनिज नाइट्रोजन संचय सीमित करने के लिए परती अवधि कम करना; नाइट्रोजन को किस्तों में देने की योजनाओं को बेहतर बनाना; नियंत्रित या धीमी-रिलीज उर्वरकों का उपयोग; नाइट्रीफिकेशन अवरोधकों का उपयोग; और जुताई, सिंचाई तथा जलनिकासी को बेहतर बनाना।
यह निर्णय पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) के लिहाज से महत्वपूर्ण है। भारत ने 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45% कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। कृषि क्षेत्र, जो भारत के कुल GHG उत्सर्जन में लगभग 14% का योगदान देता है, NDC लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
RPSC अभ्यर्थियों के लिए यह मुद्दा पर्यावरण कानून (NGT क्षेत्राधिकार), जलवायु विज्ञान (GHG), कृषि नीति (ICAR) और भारत की अंतर्राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को जोड़ता है।
0
6-अक्ष वर्गीकरण
कवरेजराष्ट्रीयविषयविज्ञान-प्रौद्योगिकीपरीक्षाबेसिक कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · CET स्नातक · CET सीनियर सेकेंडरी · EO/RO · LDC · महिला पर्यवेक्षक · पटवार · PTI · RAS · REET · RPSC SI · स्कूल व्याख्याता · सीनियर कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर · वरिष्ठ अध्यापक · UPSC · वनपाल · दोनोंस्रोतDown to Earth / NGT
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
जुड़ा प्रश्नआसान
धान के खेतों से निकलने वाली नाइट्रस ऑक्साइड, एन2ओ, प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों में चिंता का विषय मानी जाती है। 100 वर्ष की अवधि में यह कार्बन डाइऑक्साइड, सीओ2, की तुलना में लगभग कितने गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है?
व्याख्या · सही उत्तर CN2O, 100 वर्ष की वैश्विक तापन क्षमता (GWP) अवधि में CO2 की तुलना में लगभग 300 गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। यह समताप मंडल की ओजोन परत को भी नष्ट करती है, जिससे यह दोगुनी हानिकारक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
N2O, CO2 की तुलना में ग्रीनहाउस गैस के रूप में अधिक खतरनाक क्यों है?
N2O 100 वर्ष की अवधि में CO2 की तुलना में लगभग 300 गुना अधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है। इसके अलावा, यह समताप मंडल की ओजोन परत को नष्ट करती है, इसलिए इसका पर्यावरणीय प्रभाव सिर्फ तापमान वृद्धि तक सीमित नहीं रहता।
धान के खेतों से N2O कम करने के ICAR की 6 रणनीतियां क्या हैं?
ICAR की 6 रणनीतियां हैं: (1) बारी-बारी से गीला करना और सुखाना (AWD) सिंचाई; (2) स्थल-विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन (SSNM); (3) नाइट्रीफिकेशन अवरोधक; (4) धान की सीधी बुवाई (DSR) पद्धतियां; (5) जैविक संशोधनों का एकीकरण; (6) सटीक उर्वरीकरण कार्यक्रम।
पर्यावरण मामलों में NGT का क्षेत्राधिकार क्या है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को NGT अधिनियम 2010 के तहत पर्यावरण विवादों पर क्षेत्राधिकार प्राप्त है। यह स्वप्रेरणा से संज्ञान ले सकता है, याचिकाएं सुन सकता है और पर्यावरण, वन एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े मामलों में सरकारी मंत्रालयों और राज्य प्राधिकरणों को बाध्यकारी निर्देश जारी कर सकता है।
धान के खेतों से N2O भारत के NDC लक्ष्यों को कैसे प्रभावित करती है?
भारत ने NDC में 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45% कम करने की प्रतिबद्धता जताई है। कृषि क्षेत्र कुल GHG उत्सर्जन में ~14% का योगदान देता है। यदि धान की खेती से होने वाले N2O उत्सर्जन में कमी के उपाय नहीं किए गए, तो यह इन प्रतिबद्धताओं और पेरिस समझौते के तहत भारत की स्थिति को कमजोर कर सकता है।
धान की खेती में बारी-बारी से गीला करना और सुखाना (AWD) क्या है?
AWD एक सिंचाई तकनीक है, जिसमें धान के खेतों में समय-समय पर पानी भरा जाता है और अगली सिंचाई से पहले उन्हें सूखने दिया जाता है। यह मीथेन (CH4) और N2O उत्सर्जन को कम करती है, 15-30% पानी बचाती है और उपज बनाए रखती है, इसलिए इसे जलवायु-स्मार्ट कृषि की प्रमुख पद्धति माना जाता है।