अप्रैल 2026 की शुरुआत में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भीषण बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश ने पकती रबी फसलों को ठीक उस समय नुकसान पहुंचाया है जब कटाई शुरू हो रही थी, जिससे खाद्य मुद्रास्फीति और किसानों की दुर्दशा को लेकर नई चिंताएं उठी हैं। 7 अप्रैल 2026 को जयपुर में पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के मौके पर बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तूफानों ने बड़े क्षेत्रों में पकते गेहूं, सरसों, चना और जौ को गिरा दिया है और उन्होंने अधिकारियों को नुकसान आकलन तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत बीमा दावों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। राजस्थान सबसे प्रभावित राज्यों में था, भरतपुर, अलवर, सीकर, झुंझुनू तथा अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों में नुकसान की रिपोर्ट है। स्काईमेट वेदर ने चेतावनी दी है कि अप्रैल का यह ठंडा, वर्षा-युक्त पैटर्न 2026 में सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून का अग्रदूत हो सकता है, और 2026 के अंत तक एक संभावित सुपर एल नीनो उभर सकता है जो वर्षा को और कम कर सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत ने 2025 में 334 में से 331 दिनों में चरम मौसम का अनुभव किया, जिसमें 4,419 जानें गईं। भारतीय रिजर्व बैंक ने अलग से रेखांकित किया है कि अनियमित मौसम से बार-बार होने वाले आपूर्ति झटकों के कारण जलवायु परिवर्तन भारत में खाद्य मुद्रास्फीति को "स्थायी" बनाने वाली प्रमुख ताकत बन गया है। ये घटनाएं जलवायु-अनुकूल कृषि, सिंचाई सुदृढ़ीकरण और एक मजबूत फसल बीमा व्यवस्था की तत्कालता को रेखांकित करती हैं।