भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने 30 अप्रैल 2026 को वाहन-से-सर्व संचार के नियामक ढांचे पर परामर्श पत्र जारी किया। यह पत्र भारत सरकार के संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग द्वारा 1 दिसंबर 2025 को भेजे गए संदर्भ के आधार पर जारी किया गया है। विभाग ने संशोधित भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 की धारा 11(1)(क) के अंतर्गत इस संचार क्षेत्र के नियामक तंत्र पर सिफारिशें देने के लिए नियामक से अनुरोध किया था।
विज्ञप्ति में वाहन-से-सर्व संचार को ऐसा विषय माना गया है जिसके व्यापक उपयोग से पहले स्पष्ट नियामक तंत्र की जरूरत है। इसलिए यह कदम अंतिम नियम नहीं, बल्कि औपचारिक परामर्श प्रक्रिया की शुरुआत है। परामर्श पत्र नियामक की वेबसाइट पर रखा गया है और हितधारकों को उसमें उठाए गए मुद्दों पर उत्तर देने के लिए आमंत्रित किया गया है। लिखित टिप्पणियां 28 मई 2026 तक देनी हैं, जबकि प्रति-टिप्पणियां 11 जून 2026 तक देनी हैं। विज्ञप्ति में नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और लाइसेंसिंग के सलाहकार को संपर्क बिंदु बताया गया है, जिससे स्पष्ट है कि परामर्श संचार क्षेत्र के तकनीकी और लाइसेंसिंग प्रश्नों से जुड़ा है।
शासन और विज्ञान-प्रौद्योगिकी तैयारी के लिहाज से यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि भारत उभरती मोबिलिटी तकनीकों के लिए वैधानिक परामर्श से नियामक ढांचा कैसे तैयार करता है। मंत्रालय का संदर्भ मिलने पर नियामक की सिफारिशी प्रक्रिया शुरू होती है; नियामक पत्र प्रकाशित करता है; हितधारक टिप्पणियां और प्रति-टिप्पणियां देते हैं; और अंतिम सिफारिशें बाद में नीति या नियमों को दिशा दे सकती हैं। यह क्रम कनेक्टेड वाहनों के संचार के विस्तार से पहले नवाचार, सुरक्षा, स्पेक्ट्रम उपयोग, लाइसेंसिंग स्पष्टता और सार्वजनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है।
