केंद्र सरकार ने व्यापारी नौवहन अधिनियम, 2025 की धारा 13 के तहत बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो को वैधानिक निकाय के रूप में गठित करने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में जहाजों और बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट, कानूनी और समन्वित ढांचा बनाना है। यह ब्यूरो पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत काम करेगा और बंदरगाह सुरक्षा से जुड़े नियामक तथा निगरानी कार्य संभालेगा।
परीक्षा की दृष्टि से यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री अर्थव्यवस्था, माल-ढुलाई, बंदरगाह प्रशासन और संस्थागत सुधार से जुड़ता है। भारत के बड़े और छोटे बंदरगाह व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और तटीय सुरक्षा के लिए अहम हैं; इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में कई एजेंसियों के बीच समन्वय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो को नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो की तर्ज पर बनाया जा रहा है, जिससे बंदरगाह क्षेत्र में भी एक विशेष सुरक्षा नियामक ढांचा विकसित हो सके।
इस ब्यूरो की अगुवाई महानिदेशक करेंगे। एक साल की संक्रमण अवधि में नौवहन महानिदेशक बंदरगाह सुरक्षा ब्यूरो के महानिदेशक के रूप में काम करेंगे। सरकार ने सुरक्षा उपायों को स्तरीकृत और जोखिम-आधारित तरीके से लागू करने की बात कही है, जिसमें बंदरगाह की स्थिति, व्यापारिक महत्व और स्थानीय कमज़ोरियों को ध्यान में रखा जाएगा। ब्यूरो सुरक्षा-संबंधी सूचना के समय पर संग्रह, विश्लेषण और आदान-प्रदान पर भी काम करेगा, खासकर साइबर सुरक्षा और बंदरगाह आईटी ढांचे की सुरक्षा पर। मसौदा नियमों में भी इसका काम जहाजों और बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा पर नियामक निगरानी रखना बताया गया है। स्टैटिक जीके में इसे व्यापारी नौवहन अधिनियम, 2025, समुद्री सुरक्षा, तटीय सुरक्षा तंत्र और बंदरगाह प्रशासन से जोड़कर पढ़ना चाहिए।
