मार्च 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर वैश्विक और घरेलू बहस फिर से तेज हो गई। इसकी एक वजह वे रिपोर्टें भी रहीं जिनमें कहा गया कि अमेरिकी सेना ने पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान लक्ष्य तय करने के काम में AI उपकरणों का इस्तेमाल किया और पहले 24 घंटों में 1,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर गंभीर नैतिक और शासन संबंधी प्रश्न उठाए।

भारत अपना AI सुरक्षा तंत्र विकसित कर रहा है: IndiaAI मिशन (₹10,372 करोड़ की प्रमुख योजना) ने 1,00,000 के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 38,000 से अधिक GPU जोड़े हैं, जबकि BharatGen — 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करने वाला सरकारी वित्त पोषित बहुभाषी LLM — विकासाधीन है। भारत का साइबर सुरक्षा खर्च 2026 में $3.4 अरब तक पहुंचने का अनुमान है।

AI का उपयोग वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर ड्रोन स्वार्म से वास्तविक समय निगरानी, खतरों का पहले से आकलन और साइबर नेटवर्क में असामान्य गतिविधियों का पता लगाने के लिए किया जा रहा है। राजस्थान के संदर्भ में, AI आधारित निगरानी का उपयोग राजस्थान-पाकिस्तान सीमा प्रबंधन में हो सकता है, जबकि BharatGen का राजस्थानी और हिंदी भाषा समर्थन ई-गवर्नेंस के लिए प्रासंगिक है।