प्रकाशित: 22 नवंबर 2025PIBपर्यावरण
UNEP उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2025: भारत में GHG उत्सर्जन में सबसे बड़ी पूर्ण वृद्धि
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2025 जारी की। यह रिपोर्ट हर साल यह आकलन करती है कि वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5°C या 2°C तक सीमित रखने के लिए देशों की मौजूदा प्रतिबद्धताओं और जरूरी उत्सर्जन कटौती के बीच कितना अंतर है।
2025 की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएँ पूरी तरह लागू हो जाएँ, तब भी दुनिया सदी के अंत तक 2.3°C से 2.5°C तापवृद्धि की दिशा में बढ़ेगी — यानी पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य से काफी अधिक।
भारत इस रिपोर्ट में एक अहम आँकड़े के रूप में सामने आया: मापी गई अवधि में सभी देशों के बीच ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन में सबसे बड़ी कुल वृद्धि भारत में दर्ज हुई। इसके पीछे भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक आधार का विस्तार और ऊर्जा की बढ़ती मांग है। हालाँकि, भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों जैसे विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है।
एक बड़ी चिंता यह है कि COP की समय-सीमाओं के बावजूद भारत ने अभी तक पेरिस समझौते के अंतर्गत अपना अद्यतन NDC (राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान) प्रस्तुत नहीं किया है। रिपोर्ट वार्षिक जलवायु वित्त को लेकर चल रहे विवाद को भी उजागर करती है, जहाँ विकसित देश अरब रुपये प्रति वर्ष की प्रतिबद्धता पर अड़े हैं, जबकि विकासशील देश लाख करोड़ से अधिक की मांग कर रहे हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
UNEP उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2025 वैश्विक तापमान वृद्धि के बारे में क्या अनुमान लगाती है?
रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएँ, पूरी तरह लागू होने पर भी, दुनिया को सदी के अंत तक 2.3°C से 2.5°C तापमान वृद्धि की दिशा में ले जाती हैं — जो पेरिस समझौते के 1.5°C लक्ष्य से बहुत अधिक है।
कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के बावजूद भारत GHG उत्सर्जन की कुल वृद्धि में शीर्ष पर क्यों है?
भारत में GHG उत्सर्जन की कुल वृद्धि 1.4 अरब की आबादी वाले देश में तेज आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और बढ़ती ऊर्जा मांग के कारण है। इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों से बहुत नीचे है।
NDC क्या है और भारत ने इसे जमा करने में देरी क्यों की है?
राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) पेरिस समझौते के तहत किसी देश की स्वैच्छिक जलवायु कार्ययोजना है, जिसमें उत्सर्जन कटौती, नवीकरणीय ऊर्जा और अनुकूलन लक्ष्य शामिल होते हैं। भारत ने नवंबर 2025 तक अपना संशोधित NDC प्रस्तुत नहीं किया है।
उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2025 में जलवायु वित्त से जुड़ा विवाद क्या है?
विकसित देशों ने विकासशील देशों के लिए अरब प्रति वर्ष की प्रतिबद्धता जताई थी, जो खुद देर से पूरी हुई। विकासशील देशों का तर्क है कि वास्तविक जरूरत लाख करोड़ से अधिक सालाना है। बाकू में COP29 इसी अंतर को पाटने की कोशिश कर रहा है।
RPSC परीक्षा की तैयारी के लिए उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट का क्या महत्व है?
इसमें पर्यावरण, अंतरराष्ट्रीय संबंध और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ शामिल हैं — ये पेपर II के प्रमुख विषय हैं। NDC ढाँचा, जलवायु वित्त और भारत की उत्सर्जन प्रोफाइल जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर मुख्य परीक्षा के उत्तरों के लिए आवश्यक हैं।