प्रकाशित: 3 सितंबर 2025PIBअंतरराष्ट्रीय
भारतीय सशस्त्र बलों का दल अभ्यास ज़ापाद 2025 के लिए रूस रवाना
भारतीय सशस्त्र बलों का 65 सदस्यीय दल बहुपक्षीय अभ्यास ज़ापाद 2025 के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास 10-16 सितंबर को रूस के निज़्नी स्थित मुलिनो प्रशिक्षण मैदान में आयोजित हुआ। दल में कुमाऊं रेजिमेंट के नेतृत्व में थल सेना के 57, वायु सेना के 7 और नौसेना का 1 कर्मी शामिल था।
अभ्यास का मुख्य ज़ोर बहुराष्ट्रीय माहौल में उच्च तीव्रता वाले पारंपरिक युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों पर था। ईरान, बांग्लादेश, बुर्किना फासो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और माली के दलों ने भी भाग लिया। भारत ने इससे पहले 2021 के अभ्यास में भाग लिया था।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत के कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग कितनी थी?
व्याख्या · सही उत्तर CPIB के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ तक पहुंचा। इसमें रक्षा PSUs और अन्य PSUs की हिस्सेदारी लगभग 77% रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 23% योगदान दिया। दिए गए विकल्पों में 25% सबसे निकट है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अभ्यास ज़ापाद 2025 क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
**अभ्यास ज़ापाद 2025** रूस द्वारा बड़े पैमाने पर आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है। यह रूस के मुलिनो प्रशिक्षण मैदान में हुआ। भारत ने **भारतीय सशस्त्र बलों का दल** भेजकर इसमें भाग लिया। अभ्यास का मुख्य ज़ोर संयुक्त आयुध युद्ध और आतंकवाद-रोधी अभियानों पर था।
'ज़ापाद' का क्या अर्थ है और यह किस प्रकार का सैन्य अभ्यास है?
रूसी भाषा में **ज़ापाद** का अर्थ **'पश्चिम'** है। यह रूस के नेतृत्व में हर कुछ वर्षों में आयोजित होने वाला प्रमुख **रणनीतिक सैन्य अभ्यास** है, जिसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना भाग लेती हैं। ज़ापाद 2025 में संयुक्त सैन्य अभियानों, कमान और नियंत्रण तथा त्वरित तैनाती की क्षमताओं को परखा गया।
ज़ापाद जैसे रूसी सैन्य अभ्यासों में भारत की भागीदारी का क्या महत्व है?
**ज़ापाद 2025** में भारत की भागीदारी उसकी **रणनीतिक स्वायत्तता** की नीति को दर्शाती है। भारत रूस के साथ रक्षा सहयोग बनाए रखते हुए पश्चिमी साझेदारों से भी जुड़ा रहता है। रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है। इस अभ्यास से भारतीय बलों को रूसी सैन्य रणनीतियों से सीखने और दूसरे देशों के बलों के साथ मिलकर अभियान चलाने की क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।
रूस के साथ भारत की रक्षा साझेदारी और प्रमुख रक्षा आयात क्या हैं?
**भारत-रूस रक्षा साझेदारी** भारत की सबसे मज़बूत रक्षा साझेदारियों में से एक है। ऐतिहासिक रूप से भारत के लगभग 50-60% रक्षा उपकरण रूस से आए हैं। प्रमुख रूसी प्रणालियों में **S-400 ट्रायम्फ मिसाइल रक्षा प्रणाली**, **ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल** (संयुक्त उद्यम), **Su-30 MKI लड़ाकू विमान**, **किलो-श्रेणी पनडुब्बियाँ** और **T-90 टैंक** शामिल हैं।
भारत रूस और पश्चिमी देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को कैसे संतुलित करता है?
भारत **रणनीतिक स्वायत्तता** के तहत एक साथ कई देशों के साथ रक्षा संबंध बनाए रखता है—**रूस** से S-400 और ब्रह्मोस, **अमेरिका** से संचार संगतता और सुरक्षा समझौता (COMCASA), रसद विनिमय समझौता ज्ञापन (LEMOA), C-17 और P-8I विमान, **फ्रांस** से राफेल लड़ाकू विमान, **इज़राइल** से ड्रोन और मिसाइलें तथा **ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया** से रक्षा सहयोग। अलग-अलग देशों से सहयोग और रक्षा उपकरण लेने से किसी एक देश पर निर्भरता घटती है।