आंतरिक सुरक्षा: खतरे, बल, एजेंसियाँ, चुनौतियाँ
मुख्य तथ्य
- - वामपंथी उग्रवाद: 1967 नक्सलबाड़ी से शुरू — चरम (2009–10) पर 10 राज्यों के 106 जिले प्रभावित — लाल गलियारा
- - राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की स्थापना NIA अधिनियम, 2008 के तहत 26/11 मुंबई हमलों के बाद हुई — केंद्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी
- गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल - बल: सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी, एनडीआरएफ - कुल कर्मी: ~10 लाख
- - UAPA 1967 (2004, 2008, 2012, 2019 में संशोधित) भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी कानून — 2019 संशोधन से व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है
- - LeT के 10 आतंकी — 60 घंटे, 10 स्थान, 166 मृत - अजमल कसाब पकड़ा — 2012 में फाँसी - परिणाम: NIA का गठन, NSG हब, तटीय सुरक्षा सुदृढ़ीकरण
मुख्य बिंदु
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- भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ: वामपंथी उग्रवाद, पूर्वोत्तर विद्रोह, J&K और पंजाब में सीमा-पार आतंकवाद, साइबर खतरे, नारको-आतंकवाद, सांप्रदायिक हिंसा
- नोडल मंत्रालय: MHA
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- वामपंथी उग्रवाद: 1967 नक्सलबाड़ी से शुरू
- चरम (2009–10) पर 10 राज्यों के 106 जिले प्रभावित — लाल गलियारा
- 2025 तक प्रभावित जिले 18–20 तक (80% से अधिक कमी)
- 3
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की स्थापना NIA अधिनियम, 2008 के तहत 26/11 मुंबई हमलों के बाद हुई
- केंद्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी — UAPA, विस्फोटक अधिनियम, आयुध अधिनियम के तहत अपराधों की जाँच
- राज्य की अनुमति के बिना अखिल भारत अधिकारिता
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गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल
- बल: सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, एनएसजी, एनडीआरएफ
- कुल कर्मी: ~10 लाख
- 5
- UAPA 1967 (2004, 2008, 2012, 2019 में संशोधित) भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी कानून
- 2019 संशोधन से व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है
- आलोचना: पत्रकारों, कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दुरुपयोग
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- LeT के 10 आतंकी — 60 घंटे, 10 स्थान, 166 मृत
- अजमल कसाब पकड़ा — 2012 में फाँसी
- परिणाम: NIA का गठन, NSG हब, तटीय सुरक्षा सुदृढ़ीकरण
- 7
- पूर्वोत्तर विद्रोह: ULFA, NSCN, कुकी-ज़ो समूह, HNLC
- नागालैंड शांति वार्ता — 1997 से NSCN(IM) के साथ
- ब्रू-रियांग समझौता (जनवरी 2020): 37,000 शरणार्थी त्रिपुरा में स्थायी रूप से बसाए
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- साइबर खतरे: APT (चीन, पाकिस्तान), रैनसमवेयर (AIIMS दिल्ली 2022), वित्तीय धोखाधड़ी
- CERT-In और NCIIPC नोडल एजेंसियाँ
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- गोल्डन क्रेसेंट और गोल्डन ट्राएंगल मार्गों से नशीला पदार्थ तस्करी
- पंजाब ड्रग संकट — पाकिस्तान समर्थित चिट्टा तस्करी; NIA-NCB संयुक्त जाँच
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- अनुच्छेद 370 उन्मूलन (अगस्त 2019) के बाद J&K और लद्दाख दो केंद्रशासित प्रदेश बने
- ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) — पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान और POK में 9 आतंकी अड्डों पर सटीक हमले
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- ISIS/AQIS सोशल मीडिया भर्ती; NIA ने 2014 से 100+ गिरफ्तार
- दक्षिणपंथी उग्रवादी हिंसा — मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक दंगे
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- AFSPA: नागालैंड, मणिपुर (2023 में आंशिक हटाया), अरुणाचल, असम में सक्रिय
- विवादास्पद: SC (2016) — AFSPA से पूर्ण उन्मुक्ति नहीं; मुठभेड़ों की जाँच होनी चाहिए
भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौती इतनी जटिल क्यों है?
भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौती इसलिए जटिल है क्योंकि देश को लंबी भूमि सीमा, विस्तृत समुद्र तट, विविध समाज, पुराने विद्रोह, सीमापार आतंकवाद, वैचारिक हिंसा और डिजिटल खतरे एक साथ सँभालने पड़ते हैं।
पैमाना और जटिलता
भारत का आंतरिक सुरक्षा परिदृश्य असाधारण रूप से जटिल है। गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन प्रभाग के अनुसार भारत की स्थल सीमा १५,१०६.७ किमी और द्वीपों सहित समुद्र तट ७,५१६.६ किमी है। देश की खुली भूमि सीमाएँ, लंबा समुद्र तट और सामाजिक ताना-बाना अत्यंत विविध है।
चुनौतियाँ उन विद्रोहों से लेकर हैं जो उपनिवेशवादी काल के अनसुलझे प्रश्नों में निहित हैं, जैसे नागालैंड और मणिपुर; बाहरी रूप से उकसाए गए आतंकवाद, जैसे जम्मू-कश्मीर और पंजाब; वैचारिक आंदोलन जो राज्य की सत्ता को चुनौती देते हैं, जैसे वामपंथी उग्रवाद; और इक्कीसवीं सदी के साइबर और हाइब्रिड खतरों तक फैली हैं।
संवैधानिक ढाँचा
संवैधानिक ढाँचा "लोक व्यवस्था" को राज्य सूची, प्रविष्टि १, और "राज्य की सुरक्षा" को राज्य सूची, प्रविष्टि २, में रखता है।
- संघ सूची में "भारत की रक्षा", प्रविष्टि १, और राज्यों में सशस्त्र बलों की तैनाती के प्रावधान, प्रविष्टि २-क, शामिल हैं
- व्यवहार में, आंतरिक सुरक्षा राज्यों में तैनात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से प्रबंधित समवर्ती चिंता है
- गृह मंत्रालय समग्र आंतरिक सुरक्षा का समन्वय करता है
२६/११ के बाद का परिवर्तन
२६/११ मुंबई हमले, २००८ एक निर्णायक मोड़ साबित हुए — संस्थागत कमियाँ उजागर हुईं और बड़े सुधार हुए:
- समर्पित आतंकवाद-रोधी एजेंसी के रूप में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी का गठन
- बेहतर समन्वय तंत्र
- खुफिया एकीकरण के लिए बहु-एजेंसी केंद्रों की स्थापना
बाद के दशक में नक्सल हिंसा में उल्लेखनीय कमी, पूर्वोत्तर विद्रोहों का आंशिक समाधान, और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद ३७० के बाद सामान्यीकरण की दिशा दिखी — साथ ही नए और बढ़ते साइबर और ऑनलाइन कट्टरपंथीकरण के खतरे भी उभरे।
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संभावित संभावित RAS प्रश्न
PYQ रुझान और 2026 पाठ्यक्रम विश्लेषण पर आधारित
1 5M राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) क्या है? इसकी स्थापना और प्रमुख शक्तियाँ बताइए।
आदर्श उत्तर
NIA की स्थापना 26/11 मुंबई हमलों के बाद NIA अधिनियम, 2008 के तहत MHA के अंतर्गत हुई। प्रमुख शक्तियाँ: (1) राज्य की अनुमति के बिना पूरे देश में जाँच अधिकार; (2) बिना पूर्व अनुमति संपत्ति कुर्की; (3) विशेष NIA न्यायालयों में मुकदमा — 95%+ दोषसिद्धि दर।
~50 शब्द • 5 अंक
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