प्रकाशित: 30 जनवरी 2026टॉपिक
सरकार ने स्रोत पर अनिवार्य प्रसंस्करण के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित किए
केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम पूरे भारत में बड़े अपशिष्ट उत्पादकों और स्थानीय निकायों के लिए स्रोत पर ही कचरे का प्रसंस्करण अनिवार्य बनाते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन्हें 28 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया और ये 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी हो चुके हैं। पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव स्रोत पर चार धाराओं में कचरा अलग करने की व्यवस्था है: गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा।
बड़े प्रतिष्ठानों के लिए विस्तारित दायित्व भी इस ढांचे का अहम हिस्सा है। 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली संस्थाओं, जैसे बड़े मॉल, कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों, को अपने कचरे के प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी निभानी होगी। नियम केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल से अनुपालन पर नज़र रखने, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के तहत पर्यावरणीय मुआवजा लगाने, पुराने डंप स्थलों की बायोमाइनिंग और विस्तारित उत्पादक दायित्व को मजबूत करने पर भी जोर देते हैं।
प्रीलिम्स में अधिसूचना, प्रभावी तिथि, चार-धारा पृथक्करण, बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की सीमा और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह दिखाता है कि भारत शहरों में लैंडफिल पर निर्भरता घटाने, जवाबदेही बढ़ाने और कचरे को संसाधन के रूप में देखने वाली नीति की ओर बढ़ रहा है। RAS और UPSC दोनों के लिए यह समसामयिकी और स्टैटिक जीके को जोड़ने वाला उपयोगी विषय है।
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का मुख्य उद्देश्य किस आर्थिक ढाँचे को लागू करना है?
व्याख्या · सही उत्तर Bये नियम लैंडफिल पर निर्भरता घटाकर तथा बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों और स्थानीय निकायों की जवाबदेही मजबूत करके चक्रीय अर्थव्यवस्था के ढांचे को लागू करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 कब अधिसूचित हुए और कब से प्रभावी हैं?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन्हें 28 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया। ये पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 की जगह आते हैं और 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी हो चुके हैं।
नियमों में चार-धारा कचरा पृथक्करण का क्या अर्थ है?
स्रोत पर कचरे को गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल वाले कचरे में अलग करना होगा। विशेष देखभाल वाले कचरे में बैटरी, ई-कचरा और दवाइयों जैसी खतरनाक घरेलू वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।
बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के विस्तारित दायित्व का दायरा क्या है?
20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली संस्थाओं, जैसे बड़े मॉल, कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों, को अपने कचरे का प्रबंधन करना होगा। उन्हें केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल से अनुपालन पर नज़र रखने और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के तहत पर्यावरणीय मुआवजा देने की व्यवस्था से भी जोड़ा गया है।
ये नियम 2016 की व्यवस्था से कैसे अलग हैं?
इनमें 3-धारा व्यवस्था की जगह 4-धारा पृथक्करण लाया गया है और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग श्रेणी बनाया गया है। साथ ही बड़े प्रतिष्ठानों का विस्तारित दायित्व, पुराने डंप स्थलों की बायोमाइनिंग, विस्तारित उत्पादक दायित्व और डिजिटल अनुपालन व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
इन नियमों से परीक्षा में कौन-से तथ्य पूछे जा सकते हैं?
प्रीलिम्स में 28 जनवरी 2026 की अधिसूचना, 1 अप्रैल 2026 की प्रभावी तिथि, चार-धारा पृथक्करण, 20,000 वर्ग मीटर वाली सीमा और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इन्हें शहरी स्थानीय निकायों, लैंडफिल प्रबंधन और चक्राकार अर्थव्यवस्था पर नीति-आधारित उत्तरों में इस्तेमाल किया जा सकता है।