केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम पूरे भारत में बड़े अपशिष्ट उत्पादकों और स्थानीय निकायों के लिए स्रोत पर ही कचरे का प्रसंस्करण अनिवार्य बनाते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इन्हें 28 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया और ये 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी हो चुके हैं। पुराने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 की तुलना में सबसे बड़ा बदलाव स्रोत पर चार धाराओं में कचरा अलग करने की व्यवस्था है: गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा।

बड़े प्रतिष्ठानों के लिए विस्तारित दायित्व भी इस ढांचे का अहम हिस्सा है। 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक फ्लोर एरिया वाली संस्थाओं, जैसे बड़े मॉल, कार्यालय और औद्योगिक इकाइयों, को अपने कचरे के प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी निभानी होगी। नियम केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल से अनुपालन पर नज़र रखने, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत के तहत पर्यावरणीय मुआवजा लगाने, पुराने डंप स्थलों की बायोमाइनिंग और विस्तारित उत्पादक दायित्व को मजबूत करने पर भी जोर देते हैं।

प्रीलिम्स में अधिसूचना, प्रभावी तिथि, चार-धारा पृथक्करण, बड़े अपशिष्ट उत्पादकों की सीमा और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह दिखाता है कि भारत शहरों में लैंडफिल पर निर्भरता घटाने, जवाबदेही बढ़ाने और कचरे को संसाधन के रूप में देखने वाली नीति की ओर बढ़ रहा है। RAS और UPSC दोनों के लिए यह समसामयिकी और स्टैटिक जीके को जोड़ने वाला उपयोगी विषय है।