केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो एक दशक पुराने SWM नियम, 2016 की जगह लेंगे। नए नियमों में स्रोत पर अपशिष्ट को चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है — गीला अपशिष्ट (जैव-अपघटनीय), सूखा अपशिष्ट (पुनर्चक्रणीय), स्वच्छता अपशिष्ट और विशेष देखभाल अपशिष्ट — और यह व्यवस्था सभी घरों, बड़े अपशिष्ट उत्पादकों और शहरी स्थानीय निकायों पर लागू होगी।

प्रमुख प्रावधान: प्रति दिन 100 किग्रा से अधिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले बड़े उत्पादकों को जैविक अपशिष्ट को स्थल पर ही प्रसंस्कृत करना होगा; अपशिष्ट निगरानी के लिए केंद्रीकृत डिजिटल ट्रैकिंग पोर्टल; और रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF) प्रतिस्थापन लक्ष्य, जिसके अनुसार उद्योगों को छह वर्षों में RDF उपयोग 5% से बढ़ाकर 15% करना होगा। नियम 'प्रदूषक भुगतान करे' सिद्धांत पर आधारित हैं। राजस्थान के लिए जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में इनका कार्यान्वयन विशेष रूप से प्रासंगिक है।