विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक, 2025 पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने 1 अप्रैल 2026 को विषय विशेषज्ञों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के विचार सुने। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश यह विधेयक भारत की उच्च शिक्षा नियामक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन का प्रस्ताव करता है। VBSA विधेयक एक नया शीर्ष नियामक निकाय बनाने का प्रस्ताव रखता है, जो तीन मौजूदा संस्थाओं — विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) — की जगह लेगा। आयोग की तीन परिषदें होंगी: नियामक परिषद, प्रत्यायन परिषद और मानक परिषद। समर्थकों का कहना है कि इन नियामकों के विलय से दोहराव खत्म होगा और NEP 2020 के अनुरूप एकीकृत शासन व्यवस्था बनेगी। आलोचक केंद्रीकरण, संस्थागत स्वायत्तता और राज्य सरकारों की कम भागीदारी पर चिंता जता रहे हैं। JPC की रिपोर्ट मानसून सत्र से पहले आने की उम्मीद है। RAS की दृष्टि से यह विधेयक सहकारी संघवाद, शिक्षा (समवर्ती सूची) और NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा सुधार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं से जुड़ा है।