विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026, बजट सत्र में संसद में पेश किया गया। इसमें FCRA, 2010 में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है: किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द होने या समाप्त होने पर, उसकी सभी विदेशी अभिदाय राशि और उससे अर्जित संपत्ति स्वतः केंद्र सरकार के नामित प्राधिकरण में निहित हो जाएगी। वर्तमान कानून में यह व्यवस्था नहीं थी — लाइसेंस रद्द होने के बाद भी संगठन विदेशी धन से खरीदी संपत्ति अपने पास रख सकते थे। यह संशोधन गृह मंत्रालय की उन चिंताओं को दूर करता है जो पंजीकरण रद्द होने के बाद विदेशी धन के दुरुपयोग से जुड़ी थीं। केरल के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस विधेयक का विरोध किया और इसे राज्य की स्वायत्तता पर हमला बताया। उनका कहना था कि इससे केरल जैसे राज्यों में काम करने वाले NGO, शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल बुरी तरह प्रभावित होंगे। विपक्ष ने भी वैध NGO पर कार्रवाई की आशंका जताई। विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है। FCRA के तहत भारत में विदेशी चंदा लेने वाले संगठनों का पंजीकरण अनिवार्य है। गृह मंत्रालय नोडल प्राधिकरण है और उल्लंघन पाए जाने पर पंजीकरण रद्द कर सकता है। 2024 तक 16,000 से अधिक संगठन FCRA के तहत पंजीकृत थे, जो कि पहले 40,000 से अधिक थे।
विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026: पंजीकरण रद्द होने पर NGO की संपत्ति सरकार में निहित होगी
संसद में FCRA संशोधन विधेयक 2026 पेश हुआ, जिसमें जिन NGO का पंजीकरण रद्द हो चुका है, उनकी संपत्ति केंद्र सरकार में निहित करने का प्रावधान है। केरल CM ने राज्य स्वायत्तता के आधार पर इसका विरोध किया। विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया।
मुख्य तथ्य
- FCRA संशोधन विधेयक 2026 में NGO का पंजीकरण रद्द होने पर उसकी सभी संपत्ति केंद्र सरकार में निहित करने का प्रावधान है
- यह विधेयक FCRA 2010 की उस खामी को दूर करता है, जिसमें जिन NGO का पंजीकरण रद्द हो जाता था, वे संपत्ति रख सकते थे
- केरल CM ने PM मोदी को पत्र लिखकर इसे राज्य की स्वायत्तता और नागरिक समाज के लिए खतरा बताते हुए विरोध जताया
- विधेयक संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया
- गृह मंत्रालय FCRA का नोडल प्राधिकरण है; अनुपालन में सख्ती के चलते अब तक 24,000+ पंजीकरण रद्द किए गए
- FCRA के तहत वर्तमान में 16,000 से अधिक संगठन पंजीकृत हैं, जो पहले 40,000+ थे
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: विदेशी अभिदाय संशोधन विधेयक 2026 के नागरिक समाज संगठनों और केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
विदेशी अभिदाय संशोधन विधेयक 2026 पंजीकरण रद्द होने पर संगठनों की संपत्ति केंद्र सरकार में निहित करता है, जिससे विदेशी धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। केरल के मुख्यमंत्री ने राज्य स्वायत्तता का हवाला देकर विरोध किया। संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया यह विधेयक कड़ी निगरानी की ओर संकेत करता है, जबकि वर्तमान में 16,000 से अधिक संगठन पंजीकृत हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FCRA संशोधन विधेयक 2026 में क्या प्रस्तावित है?
इसमें प्रस्ताव है कि NGO का FCRA पंजीकरण रद्द होने पर उसकी सभी विदेशी अभिदाय राशि और संपत्ति स्वतः केंद्र सरकार के नामित प्राधिकरण में निहित हो जाएगी।
केरल CM ने FCRA संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया?
उनका तर्क था कि यह विधेयक राज्य की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है और केरल में काम करने वाले NGO, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है।
FCRA का नोडल प्राधिकरण कौन है?
गृह मंत्रालय (MHA) FCRA का नोडल प्राधिकरण है और उल्लंघन पर पंजीकरण रद्द कर सकता है।
FCRA संशोधन विधेयक 2026 की वर्तमान स्थिति क्या है?
विधेयक को व्यापक परामर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है।
हाल के वर्षों में FCRA पंजीकरण में क्या बदलाव आया है?
MHA की सख्त अनुपालन नीति के कारण FCRA पंजीकरण 40,000 से घटकर लगभग 16,000 रह गए हैं।
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