वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 मार्च 2026 को लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 प्रस्तुत किया, जिसे विस्तृत जाँच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया है। 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सांसदों वाली यह JPC मानसून सत्र के पहले सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट देगी।\n\nयह विधेयक दो प्रमुख कानूनों — कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी (LLP) अधिनियम 2008 — में संशोधन करता है। इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं: छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और व्यापार के नियामकीय ढाँचे को आधुनिक बनाना।\n\nप्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं: दोनों अधिनियमों के अंतर्गत कई समझौता-योग्य अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और प्रक्रियागत उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड की जगह नागरिक दंड लागू करना; दिवालियापन एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) को मूल्यांकनकर्ताओं के पंजीकरण के लिए वैधानिक मूल्यांकन प्राधिकरण बनाना; और मौजूदा ESOP के साथ-साथ प्रतिबंधित स्टॉक यूनिट (RSU) और स्टॉक प्रशंसा अधिकार (SAR) जैसे कर्मचारियों को दिए जाने वाले नए प्रतिफल साधनों को मान्यता देना।\n\nविधेयक SEBI-पंजीकृत या IFSC-पंजीकृत ट्रस्टों को LLP में रूपांतरित करने की भी अनुमति देता है। JPC को भेजना सरकार के सावधानीपूर्ण विधायी दृष्टिकोण को दर्शाता है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने इसे भारत के व्यापार-सुगमता एजेंडा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।