विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। यह विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 में संशोधन का प्रस्ताव रखता है। विधेयक गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और नागरिक समाज समूहों को मिलने वाले विदेशी वित्तपोषण की निगरानी में बड़े बदलाव लाने की बात करता है।

विधेयक का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान एक "नामित प्राधिकरण" की स्थापना है। यह प्राधिकरण उन संगठनों की विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले सकता है, उनका प्रबंधन कर सकता है या उन्हें बेच सकता है, जिनका FCRA पंजीकरण निलंबित, रद्द या नवीनीकृत न हो। यह प्रावधान पंजीकरण समाप्त होने के बाद भी सरकार को NGO की संपत्तियों पर नियंत्रण देता है।

अन्य प्रमुख बदलावों में FCRA उल्लंघन के लिए अधिकतम कारावास की सजा पाँच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करना; किसी जाँच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य करना; और विदेशी वित्त के उपयोग पर अधिक निगरानी शामिल हैं। विधेयक को 1 अप्रैल 2026 को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विधायी प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया।

FCRA 2010 भारत में व्यक्तियों, संघों और कंपनियों द्वारा विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को नियंत्रित करता है। यह विधेयक, यदि पारित होता है, तो नागरिक समाज की निगरानी में बड़े केंद्रीकरण की दिशा में कदम होगा।