जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 ने 79 केंद्रीय अधिनियमों में 1000+ अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाया
Aसीधा उत्तर
जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 संसद द्वारा पारित; 79 अधिनियमों में 1000+ अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया और 717 आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंड में बदला गया।
मुख्य तथ्य
जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित
79 केंद्रीय अधिनियमों में 1,000 से अधिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया
717 आपराधिक प्रावधानों को जुर्माने और समझौते सहित नागरिक दंड में बदला
लोकसभा की चयन समिति की अध्यक्षता तेजस्वी सूर्या ने की
23 मंत्रालयों के अधिनियम शामिल; जन विश्वास अधिनियम 2023 पर आधारित, जिसने 183 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया। यह भारत की नियामक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार है। विधेयक 79 केंद्रीय अधिनियमों में 1,000 से अधिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और 717 आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंड में बदलता है। इसमें कारावास की जगह जुर्माने और समझौता तंत्र का प्रावधान किया गया है।
विधेयक की समीक्षा करने वाली लोकसभा की चयन समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने की। कानून का उद्देश्य मामूली नियामक उल्लंघनों के लिए आपराधिक अभियोजन के खतरे को समाप्त करके व्यवसायों और नागरिकों पर अनुपालन बोझ कम करना है। यह 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित अधिनियमों पर लागू होता है। विधेयक जन विश्वास अधिनियम 2023 पर आधारित है, जिसने 42 अधिनियमों में 183 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था। इस तरह यह भारत में व्यापार सुगमता में बाधा बनने वाले आपराधिक कानून प्रावधानों को तार्किक बनाने का दायरा काफी बढ़ाता है।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: जन विश्वास (संशोधन) विधेयक दो हजार छब्बीस के उद्देश्यों एवं प्रमुख विशेषताओं तथा भारत में व्यवसाय सुगमता पर इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिए। उत्तर (50 शब्द): संसद द्वारा पारित जन विश्वास संशोधन विधेयक ने उन्यासी केंद्रीय अधिनियमों के एक हजार अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया तथा सात सौ सत्रह आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंडों में बदला। तेईस मंत्रालयों को शामिल करते हुए यह कारावास के स्थान पर जुर्माने की व्यवस्था लागू करता है और अनुपालन भार घटाकर नियामक सुधारों का दायरा बढ़ाता है।
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यह 80 केंद्रीय अधिनियमों में 1,000 से अधिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और 717 आपराधिक प्रावधानों को दीवानी दंड में बदलता है।
इस विधेयक की समीक्षा करने वाली समिति की अध्यक्षता किसने की?
लोकसभा की चयन समिति की अध्यक्षता तेजस्वी सूर्या ने की।
यह विधेयक जन विश्वास अधिनियम 2023 से कैसे भिन्न है?
2023 अधिनियम ने 42 अधिनियमों में 183 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया, जबकि 2026 विधेयक इसे 79 अधिनियमों में 1,000+ अपराधों तक विस्तारित करता है।
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