प्रकाशित: 2 अप्रैल 2026समाचार स्रोतशासन
जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 ने 79 केंद्रीय अधिनियमों में 1000+ अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाया
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया। यह भारत की नियामक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार है। विधेयक 79 केंद्रीय अधिनियमों में 1,000 से अधिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है और 717 आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंड में बदलता है। इसमें कारावास की जगह जुर्माने और समझौता तंत्र का प्रावधान किया गया है।
विधेयक की समीक्षा करने वाली लोकसभा की चयन समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने की। कानून का उद्देश्य मामूली नियामक उल्लंघनों के लिए आपराधिक अभियोजन के खतरे को समाप्त करके व्यवसायों और नागरिकों पर अनुपालन बोझ कम करना है। यह 23 मंत्रालयों द्वारा प्रशासित अधिनियमों पर लागू होता है। विधेयक जन विश्वास अधिनियम 2023 पर आधारित है, जिसने 42 अधिनियमों में 183 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था। इस तरह यह भारत में व्यापार सुगमता में बाधा बनने वाले आपराधिक कानून प्रावधानों को तार्किक बनाने का दायरा काफी बढ़ाता है।
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प्रश्न: जन विश्वास (संशोधन) विधेयक दो हजार छब्बीस के उद्देश्यों एवं प्रमुख विशेषताओं तथा भारत में व्यवसाय सुगमता पर इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिए। उत्तर (50 शब्द): संसद द्वारा पारित जन विश्वास संशोधन विधेयक ने उन्यासी केंद्रीय अधिनियमों के एक हजार अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया तथा सात सौ सत्रह आपराधिक प्रावधानों को नागरिक दंडों में बदला। तेईस मंत्रालयों को शामिल करते हुए यह कारावास के स्थान पर जुर्माने की व्यवस्था लागू करता है और अनुपालन भार घटाकर नियामक सुधारों का दायरा बढ़ाता है।
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जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 के तहत कितने केंद्रीय अधिनियम शामिल हैं?
व्याख्या · सही उत्तर Cजन विश्वास संशोधन विधेयक 2026 में 79 केंद्रीय अधिनियम शामिल हैं और इनमें 1,000 से अधिक अपराधों को विअपराधीकृत किया गया है।