संसदीय समिति ने चेताया: अस्थायी जल स्रोतों के कारण जल जीवन मिशन का लक्ष्य खतरे में
Aसीधा उत्तर
मार्च 2026 में संसदीय समिति ने चेताया कि जल जीवन मिशन (81% कवरेज पर अटका) जल स्रोत सूखने से विफल हो सकता है। 2019 से 12.56 करोड़ परिवारों को जोड़ा गया, लेकिन शेष 20% के लिए अनुपातहीन निवेश चाहिए। मिशन 2028 तक बढ़ाया गया।
मुख्य तथ्य
मार्च 2026 में संसदीय स्थायी समिति ने चेतावनी दी कि अस्थायी जल स्रोतों के कारण जल जीवन मिशन (JJM) लक्ष्य खतरे में हैं।
JJM की कवरेज ~81% पर अटकी; मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 की गई।
2019 में PM मोदी द्वारा शुरू किए गए JJM के तहत 12.56 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन मिला।
कई मौजूदा कनेक्शन एक वर्ष के भीतर पानी देना बंद कर देते हैं — जलभृतों, नदियों और भूजल का ह्रास मुख्य कारण है।
शेष ~20% कवरेज दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में है, जिसके लिए अपेक्षाकृत बहुत अधिक निवेश चाहिए।
समिति ने जल स्रोतों की स्थिरता का ऑडिट, वर्षा जल संचयन को जोड़ने और गुणवत्ता निगरानी की सिफारिश की।
मार्च 2026 के आसपास संसद में प्रस्तुत संसदीय स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि जल जीवन मिशन (JJM) — हर घर जल (प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल) की प्रमुख योजना — टिकाऊ जल स्रोत सुनिश्चित किए बिना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल हो सकता है। 2019 में मिशन शुरू होने के बाद से 12.56 करोड़ ग्रामीण परिवारों को कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) मिले हैं, लेकिन 2025 से यह मिशन लगभग 81% घरेलू कवरेज पर अटका हुआ है। शेष 19–20% को कवर करने के लिए पहले 80% पर हुए खर्च की तुलना में अनुपातहीन निवेश की आवश्यकता है।
समिति ने पाया कि कई राज्यों में JJM बुनियादी ढांचे के लिए इस्तेमाल किए गए भूजल और सतही जल स्रोत चालू होने के 12 महीनों के भीतर सूख गए। मिशन को 2028 तक आधिकारिक रूप से बढ़ाया गया है। राजस्थान — भारत के सर्वाधिक जल-संकटग्रस्त राज्यों में से एक — के लिए यह चेतावनी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। नागौर और बाड़मेर जैसे जिलों में अत्यधिक दोहन किया गया भूजल JJM की दीर्घकालिक सफलता के लिए बड़ी चुनौती है।
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जल जीवन मिशन पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट ने किस प्रमुख मुद्दे पर चिंता जताई?
व्याख्या · सही उत्तर A
संसदीय समिति की रिपोर्ट में वित्तपोषण में देरी और लक्ष्य से विचलन को जल जीवन मिशन की पूर्णता समयसीमा के लिए प्रमुख जोखिम बताया गया।
सत्यापित
स्रोत: स्रोत विवरण उपलब्ध नहीं है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जल जीवन मिशन क्या है और इसके मूल लक्ष्य क्या थे?
जल जीवन मिशन (JJM) अगस्त 2019 में PM मोदी द्वारा शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य 2024 तक भारत के प्रत्येक ग्रामीण परिवार (लगभग 19 करोड़) को नल जल कनेक्शन देना था। यह जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा संचालित है। कवरेज ~81% पर अटकने के कारण समय-सीमा बढ़ाकर 2028 की गई।
मार्च 2026 में संसदीय स्थायी समिति ने JJM के बारे में क्या विशेष चेतावनी दी?
समिति ने मार्च 2026 में चेताया कि पहले से लगाए गए 12.56 करोड़ नल कनेक्शनों में से कई एक वर्ष के भीतर सूख जाते हैं। मुख्य कारण यह है कि कनेक्शन देते समय स्थायी जल स्रोत सुनिश्चित नहीं किए गए — जलभृत खाली हो चुके हैं, नदियाँ सूख गई हैं और भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ है।
JJM की शेष 20% कवरेज इतनी कठिन और महँगी क्यों है?
पहले 80% कनेक्शन अपेक्षाकृत सुलभ मैदानी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दिए गए। शेष ~20% में दूरदराज पहाड़ी इलाके, घने आदिवासी वन क्षेत्र, मरुस्थलीय जिले और भौगोलिक दृष्टि से अलग-थलग बस्तियाँ हैं — जहाँ पाइपलाइन बिछाना तकनीकी रूप से जटिल और प्रति परिवार लागत कई गुना अधिक है।
संसदीय समिति ने JJM के लिए कौन-से सुधारात्मक उपाय सुझाए?
समिति ने सुझाया: (1) नए कनेक्शन से पहले जल-स्रोत की स्थिरता का ऑडिट अनिवार्य करना; (2) भूजल पुनर्भरण के लिए वर्षा जल संचयन की संरचनाओं को साथ जोड़ना; (3) घरेलू नलों पर जल गुणवत्ता की सख्त निगरानी रखना (खासकर फ्लोराइड और आर्सेनिक के लिए); और (4) नए विस्तार से पहले मौजूदा निष्क्रिय कनेक्शनों की मरम्मत को प्राथमिकता देना।
JJM की चुनौती राजस्थान की विशिष्ट जल स्थिति से कैसे जुड़ती है और RAS के लिए यह क्यों प्रासंगिक है?
राजस्थान वर्षा की दृष्टि से भारत का सबसे सूखा राज्य है और नागौर, जोधपुर, बाड़मेर जैसे जिलों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो चुका है। RAS परीक्षा में यह जल संसाधन प्रबंधन, भूजल कानून, MNREGA से जुड़े जल कार्य, ग्रामीण विकास योजनाएँ और केंद्र प्रायोजित योजनाओं में वित्तीय संबंध जैसे विषयों से जुड़ता है।
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