NITI आयोग के PM-JAY योजना मूल्यांकन से पता चला कि स्वास्थ्य बीमा कवरेज होने के बावजूद 65% लाभार्थियों को अपनी जेब से खर्च (OOPE) करना पड़ा। निजी अस्पतालों में OOPE औसतन ₹53,965 प्रति भर्ती रहा, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह ₹21,827 था। केवल 35% लाभार्थियों को पूरी तरह कैशलेस उपचार मिला। 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 2,283 परिवारों पर आधारित यह अध्ययन योजना के कार्यान्वयन में लगातार बनी कमियों को दिखाता है। PM-JAY का सितंबर 2024 में 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी नागरिकों तक विस्तार किया गया, लेकिन OOPE की समस्या गरीबों के लिए विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय समाप्त करने के लक्ष्य को कमजोर करती है।
PM-JAY मूल्यांकन: कवरेज के बावजूद 65% लाभार्थियों को जेब से खर्च करना पड़ा
NITI आयोग ने पाया कि PM-JAY के 65% लाभार्थियों को जेब से खर्च करना पड़ता है; केवल 35% को पूर्ण कैशलेस उपचार मिलता है।
मुख्य तथ्य
- नीति आयोग द्वारा कराए गए मूल्यांकन में पाया गया कि PM-JAY के 65% लाभार्थियों को स्वास्थ्य बीमा होने के बावजूद जेब से खर्च (OOPE) करना पड़ा।
- उपचार के दौरान अतिरिक्त शुल्क, दवाइयां और परिवहन प्रमुख खर्च थे।
- PM-JAY के तहत ₹5 लाख प्रति परिवार वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है।
- रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि अस्पताल में भर्ती से पहले और बाद की देखभाल का खर्च भी कवर में शामिल किया जाए।
- PM-JAY दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है।
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नीति आयोग के AI for Viksit Bharat रोडमैप के अनुसार, AI-आधारित बदलाव 2035 तक भारत की GDP वृद्धि-अंतराल का कम-से-कम कितना हिस्सा पूरा कर सकता है?
नीति आयोग का AI for Viksit Bharat रोडमैप AI को 2035 तक ऊंची वृद्धि-पथ हासिल करने का अहम साधन मानता है। इसमें अनुमान है कि AI-आधारित बदलाव GDP वृद्धि-अंतराल का कम-से-कम 10 से 14 खरब अमेरिकी डॉलर हिस्सा पूरा कर सकता है, जिसमें उत्पादकता लाभ और नवाचार दोनों की भूमिका होगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
PM-JAY कवरेज के बावजूद कितने प्रतिशत लाभार्थियों पर जेब से खर्च होता है?
**NITI आयोग के मूल्यांकन** के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा कवरेज होने के बावजूद **PM-JAY के 65% लाभार्थियों** पर जेब से खर्च (OOPE) हुआ। केवल **35%** को पूर्णतः कैशलेस उपचार मिला। यह अध्ययन **13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 2,283 परिवारों** पर आधारित था।
PM-JAY के तहत निजी अस्पतालों में औसत जेब खर्च कितना है?
**PM-JAY** के तहत **निजी अस्पतालों** में औसत जेब खर्च (OOPE) **₹53,965 प्रति अस्पताल में भर्ती** था, जबकि **सरकारी अस्पतालों में ₹21,827** — यानी लगभग **2.5 गुना अधिक**। यह **NITI आयोग मूल्यांकन** का प्रमुख निष्कर्ष है, जो बताता है कि बीमा कवरेज के बावजूद 65% लाभार्थियों ने जेब से भुगतान किया।
NITI आयोग के PM-JAY मूल्यांकन अध्ययन में क्या शामिल था और क्या पाया गया?
**NITI आयोग का PM-JAY मूल्यांकन** **13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 2,283 परिवारों** पर आधारित था। प्रमुख निष्कर्ष: - कवरेज के बावजूद **65%** लाभार्थियों पर जेब खर्च - निजी अस्पतालों में OOPE औसतन **₹53,965**, जबकि सरकारी में **₹21,827** - केवल **35%** को पूरी तरह कैशलेस उपचार मिला
PM-JAY का विस्तार 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तक कब किया गया?
**PM-JAY (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना)** का **सितंबर 2024** में विस्तार कर **70 वर्ष और उससे अधिक आयु** के सभी नागरिकों को, आय की परवाह किए बिना, शामिल किया गया। हालांकि **NITI आयोग मूल्यांकन** से पता चला कि **65% लाभार्थियों** पर अब भी जेब खर्च होता है; निजी अस्पतालों में यह औसतन **₹53,965 प्रति अस्पताल में भर्ती** है।
PM-JAY का लक्ष्य क्या है और जेब खर्च वाला निष्कर्ष क्यों महत्वपूर्ण है?
**PM-JAY** का प्राथमिक लक्ष्य कैशलेस स्वास्थ्य बीमा देकर **गरीबों के लिए विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय समाप्त करना** है। NITI आयोग का यह निष्कर्ष कि **65% लाभार्थियों** पर अब भी जेब खर्च होता है — निजी अस्पतालों में औसतन **₹53,965** — योजना के उद्देश्य और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच बड़े अंतर को दर्शाता है।
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