भारत ने "वन नेशन वन लाइसेंस" कॉपीराइट ढांचा प्रस्तावित कर वैश्विक AI गवर्नेंस में अग्रणी भूमिका ली है। दिसंबर 2025 में सामने आए इस प्रस्ताव में एक अनिवार्य व्यापक लाइसेंसिंग प्रणाली बनाने की बात है। इसके तहत AI कंपनियों को कॉपीराइट सामग्री पर अपने मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय लाइसेंस लेना होगा और एक नए निकाय — कॉपीराइट रॉयल्टी संग्रह और प्रशासन न्यायाधिकरण (CRCAT) — के ज़रिए अधिकार धारकों को वैधानिक रॉयल्टी देनी होगी।

यह प्रस्ताव AI गवर्नेंस की सबसे विवादास्पद वैश्विक बहस से सीधे जुड़ा है: क्या बड़े भाषा मॉडल और अन्य जेनरेटिव AI सिस्टम, जो इंटरनेट से स्क्रैप की गई कॉपीराइट सामग्री — किताबें, लेख, संगीत, कलाकृतियाँ — पर प्रशिक्षण लेते हैं, कॉपीराइट उल्लंघन करते हैं या नहीं।

भारत का मॉडल एक मध्य मार्ग अपनाता है: यह न तो कॉपीराइट सामग्री पर AI प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगाता है और न ही इसे मुफ्त में अनुमति देता है। इसके बजाय, यह फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनिवार्य लाइसेंसिंग के समान एक वैधानिक लाइसेंसिंग ढांचा बनाता है।

यदि लागू किया जाता है, तो भारत जेनरेटिव AI कॉपीराइट को विशेष रूप से नियंत्रित करने वाला औपचारिक कानून लागू करने वाला पहला देश होगा — यूरोपीय संघ के AI अधिनियम और प्रस्तावित अमेरिकी कानून से आगे।

RAS अभ्यर्थियों के लिए: यह बौद्धिक संपदा अधिकारों (GS पेपर II/III), डिजिटल अर्थव्यवस्था गवर्नेंस, भारत की AI रणनीति (IndiaAI मिशन), और रचनात्मक उद्योगों से जुड़ता है।