प्रकाशित: 10 दिसंबर 2025समाचार स्रोतशासन
भारत ने AI प्रशिक्षण के लिए "वन नेशन वन लाइसेंस" कॉपीराइट मॉडल प्रस्तावित किया
भारत ने "वन नेशन वन लाइसेंस" कॉपीराइट ढांचा प्रस्तावित कर वैश्विक AI गवर्नेंस में अग्रणी भूमिका ली है। दिसंबर 2025 में सामने आए इस प्रस्ताव में एक अनिवार्य व्यापक लाइसेंसिंग प्रणाली बनाने की बात है। इसके तहत AI कंपनियों को कॉपीराइट सामग्री पर अपने मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय लाइसेंस लेना होगा और एक नए निकाय — कॉपीराइट रॉयल्टी संग्रह और प्रशासन न्यायाधिकरण (CRCAT) — के ज़रिए अधिकार धारकों को वैधानिक रॉयल्टी देनी होगी।
यह प्रस्ताव AI गवर्नेंस की सबसे विवादास्पद वैश्विक बहस से सीधे जुड़ा है: क्या बड़े भाषा मॉडल और अन्य जेनरेटिव AI सिस्टम, जो इंटरनेट से स्क्रैप की गई कॉपीराइट सामग्री — किताबें, लेख, संगीत, कलाकृतियाँ — पर प्रशिक्षण लेते हैं, कॉपीराइट उल्लंघन करते हैं या नहीं।
भारत का मॉडल एक मध्य मार्ग अपनाता है: यह न तो कॉपीराइट सामग्री पर AI प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगाता है और न ही इसे मुफ्त में अनुमति देता है। इसके बजाय, यह फार्मास्युटिकल क्षेत्र में अनिवार्य लाइसेंसिंग के समान एक वैधानिक लाइसेंसिंग ढांचा बनाता है।
यदि लागू किया जाता है, तो भारत जेनरेटिव AI कॉपीराइट को विशेष रूप से नियंत्रित करने वाला औपचारिक कानून लागू करने वाला पहला देश होगा — यूरोपीय संघ के AI अधिनियम और प्रस्तावित अमेरिकी कानून से आगे।
RAS अभ्यर्थियों के लिए: यह बौद्धिक संपदा अधिकारों (GS पेपर II/III), डिजिटल अर्थव्यवस्था गवर्नेंस, भारत की AI रणनीति (IndiaAI मिशन), और रचनात्मक उद्योगों से जुड़ता है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण के लिए भारत के प्रस्तावित 'वन नेशन वन लाइसेंस' कॉपीराइट ढांचे की प्रमुख विशेषताओं और इसके वैश्विक नियामक महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारत का दिसंबर 2025 का प्रस्ताव कॉपीराइट सामग्री पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण के लिए अनिवार्य ब्लैंकेट लाइसेंसिंग ढांचा बनाता है। एक नया कॉपीराइट रॉयल्टी संग्रह एवं प्रशासन न्यायाधिकरण वैधानिक रॉयल्टी तय करेगा। यह प्रतिबंध और मुक्त उपयोग के बीच मध्य मार्ग अपनाता है, जिससे भारत जेनरेटिव एआई कॉपीराइट कानून वाला पहला देश बनेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
AI के लिए 'वन नेशन वन लाइसेंस' कॉपीराइट प्रस्ताव क्या है?
यह भारत का प्रस्तावित अनिवार्य ब्लैंकेट लाइसेंसिंग सिस्टम है जिसके तहत AI कंपनियों को कॉपीराइट सामग्री पर प्रशिक्षण के लिए एकल राष्ट्रीय लाइसेंस लेना होगा और CRCAT के माध्यम से अधिकार धारकों को वैधानिक रॉयल्टी देनी होगी।
CRCAT क्या है?
CRCAT का पूरा नाम कॉपीराइट रॉयल्टी संग्रह और प्रशासन न्यायाधिकरण है — भारतीय मॉडल के तहत प्रस्तावित एक नई संस्था जो AI प्रशिक्षण में उपयोग की गई सामग्री के कॉपीराइट धारकों को देय रॉयल्टी एकत्र और प्रशासित करेगी।
भारत के प्रस्ताव को वैश्विक प्रथम क्यों माना जाता है?
भारत का प्रस्ताव जेनरेटिव AI प्रशिक्षण के लिए रॉयल्टी के प्रश्न को विशेष रूप से संबोधित करने वाला पहला औपचारिक विधायी प्रस्ताव है — EU AI Act जोखिम श्रेणियों को कवर करता है लेकिन प्रशिक्षण डेटा रॉयल्टी को व्यापक रूप से नहीं।
भारतीय मॉडल की तुलना फार्मास्युटिकल अनिवार्य लाइसेंसिंग से कैसे होती है?
फार्मा में अनिवार्य लाइसेंसिंग (पेटेंट अधिनियम 1970 की धारा 84) की तरह, यह मॉडल अधिकार धारक की सहमति के बिना AI प्रशिक्षण के लिए कॉपीराइट सामग्री के उपयोग की अनुमति देता है, लेकिन वैधानिक रॉयल्टी के माध्यम से मुआवजे को अनिवार्य करता है।
इस प्रस्ताव के लिए कौन से मौजूदा भारतीय कानून प्रासंगिक हैं?
कॉपीराइट अधिनियम 1957, TRIPS समझौता, बर्न कन्वेंशन और IndiaAI मिशन सभी इस प्रस्ताव के लिए प्रासंगिक हैं।