डॉ. अरविंद पनगड़िया की अध्यक्षता में 16वें वित्त आयोग ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसे 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट के साथ संसद में पेश किया गया। सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों की 41% हिस्सेदारी बनाए रखने की इसकी प्रमुख सिफारिश स्वीकार की।

आयोग ने सिफारिश की कि केंद्र 2030-31 तक राजकोषीय घाटा GDP के 3.5% तक कम करे, जबकि राज्यों को GSDP के 3% की सीमा बनाए रखनी चाहिए। यह पात्रता के आधार पर हस्तांतरण की व्यवस्था से अनुपालन पर आधारित राजकोषीय मॉडल की ओर बदलाव को दर्शाता है। रिपोर्ट में ऑफ-बजट उधारी पर सख्त प्रतिबंध लगाने और राज्यों में बिजली डिस्कॉम के निजीकरण की सिफारिश की गई है। संयुक्त केंद्र और राज्य ऋण 2030-31 तक GDP के 77.3% से 73.1% तक घटने का अनुमान है।