भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1), यानी अप्रैल-जून 2026, के लिए राज्य बाज़ार उधारी कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर के अनुसार, राज्य सरकारें Q1 FY2026-27 के दौरान राज्य विकास ऋण (SDL) से कुल 2,54,509 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं।

राज्य विकास ऋण (SDL) दिनांकित प्रतिभूतियाँ हैं, जिन्हें राज्य सरकारें अपने राजकोषीय घाटे की वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए RBI के ज़रिए जारी करती हैं। SDL वह प्रमुख साधन है, जिसके ज़रिए राज्य सरकारें बजटीय वित्तपोषण के लिए पूंजी बाज़ारों से धन जुटाती हैं। ये केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों (G-Sec) जैसी होती हैं, लेकिन राज्य सरकारों के अलग-अलग ऋण प्रोफाइल को देखते हुए इन पर थोड़ा अधिक प्रतिफल (यील्ड) मिलता है।

इस कैलेंडर के साथ एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में SDL के लिए बेंचमार्क निर्गम रणनीति भी शुरू की गई है, जिसे Q1 FY2026-27 में नौ राज्यों में पायलट आधार पर लागू किया जा रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य SDL बाज़ार में पारदर्शिता बढ़ाना, कीमत तय होने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना और बाज़ार की गहराई बढ़ाना है। बेंचमार्क दृष्टिकोण के तहत, राज्य बिखरे हुए और गैर-मानकीकृत निर्गमों के बजाय निश्चित परिपक्वता अवधियों पर मानकीकृत और अधिक तरल बेंचमार्क प्रतिभूतियाँ जारी करेंगे। इससे उधारी लागत घटने, व्यापक निवेशक आधार आकर्षित होने और SDL साधनों के लिए द्वितीयक बाज़ार में तरलता सुधरने की उम्मीद है।

बेंचमार्क निर्गम रणनीति विश्व स्तर पर सॉवरिन बॉन्ड बाज़ारों में अपनाई जाने वाली बेहतर प्रथाओं के अनुरूप है, जहाँ बेंचमार्क बॉन्ड अन्य साधनों के मूल्य निर्धारण के लिए संदर्भ बिंदु का काम करते हैं। भारत के SDL बाज़ार के लिए — जो राज्य राजकोषीय प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है — यह उप-सॉवरिन ऋण बाज़ार ढाँचे का एक सार्थक आधुनिकीकरण है।

राजस्थान भारत के प्रमुख उधारकर्ता राज्यों में शामिल है और उसका राजकोषीय घाटा बड़ा है। इसलिए SDL कैलेंडर और बेंचमार्क रणनीति का FY2026-27 में उसकी उधारी लागत और ऋण प्रबंधन कार्यक्रम पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।