नीति आयोग ने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण 13 मार्च 2026 को जारी किया। इसमें वित्त वर्ष 2023–24 के दौरान 18 प्रमुख भारतीय राज्यों और 10 पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के राजकोषीय प्रदर्शन का आकलन किया गया। सूचकांक के पांच स्तंभ हैं: व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, राजकोषीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता। इसके लिए नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा लेखापरीक्षित राज्यों के खातों के आंकड़े लिए गए हैं।

प्रमुख राज्यों में ओडिशा 73.1 अंकों के साथ लगातार दूसरे वर्ष पहले स्थान पर रहा। इसके पीछे राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (FRBM) के तहत तय 3% की सीमा के भीतर राजकोषीय घाटा, सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की तुलना में घटता ऋण और बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य व शिक्षा पर अधिक पूंजी परिव्यय प्रमुख कारण रहे। गोवा 54.7 अंकों के साथ दूसरे और झारखंड 50.5 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। राज्यों को चार श्रेणियों में रखा गया: अचीवर्स (ओडिशा, गोवा, झारखंड), फ्रंट रनर्स (गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक), परफॉर्मर्स (मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु, राजस्थान) और एस्पिरेशनल (केरल, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, पंजाब)।

राजस्थान को 'परफॉर्मर' श्रेणी में रखा गया है। यह वित्त वर्ष 2023–24 में राज्य के व्यय की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाता है। हालांकि, अधिक राजस्व घाटा, सब्सिडी पर अधिक निर्भरता और बढ़ता ऋण अब भी राजस्थान के सामने बड़ी संरचनात्मक चुनौतियां हैं। सूचकांक बताता है कि राज्यों को अपना कर राजस्व बढ़ाने और वेतन, पेंशन तथा ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध खर्च घटाने की ज़रूरत है।